संदेश

सावन विशेष: शिव के प्रिय..

चित्र
सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

कृष्ण जन्माष्टमी: भगवान कृष्ण के साथ माता यशोदा का पूजन

चित्र
कृष्ण जन्माष्टमी:  भगवान कृष्ण के साथ माता यशोदा का पूजन (Krishna Birthday)       Pic courte: freepik      कृष्ण जन्माष्टमी है तो कृष्ण का ही सुमिरन होगा। भादौ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान कृष्ण का जन्मदिवस एक पर्व होता है जिसे घर घर में उत्सव के रूप में मनाया जाता है। चाहे मंदिर हो, घर हो, पास पड़ोस का आंगन हो या किसी गली मोहल्ले का मैदान कृष्ण की लीलाओं की झांकी तो दिख ही जाती है। जितनी लीलाएं उतने नाम। चारों ओर बस कृष्ण-कृष्ण और बस राधे-राधे।     कृष्ण की तो इतनी विशेषताएं हैं कि उनको गिना नहीं जा सकता और न ही उनके जैसा बना जा सकता है क्योंकि वे तो मानव अवतार में स्वयं भगवान विष्णु जी हैं और भगवान बनना हम मानवों के बस की बात नहीं तो बस आंख मूंद कर उनका स्मरण करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि जिसप्रकार से भगवान कृष्ण ने लोगों की संकट में सहायता की वैसे ही वे हम सभी के कष्ट हरेंगे।    लेकिन कृष्ण जन्माष्टमी में हम किसी भी दुख या कष्ट के लिए सुमिरन नहीं करते। जन्माष्टमी तो उत्सव होता है भगवान कृष्ण के जन्म का तो ...

स्वतंत्रता दिवस...उड़ना अभी बाकी है।।

चित्र
स्वतंत्रता दिवस...उड़ना अभी बाकी है।।     74 साल तो हो चुके हैं भारत को आजाद हुए लेकिन आज भी स्वतंत्रता दिवस मनाने की खुशी भारत के हर नागरिक को पहले जैसी ही है। आज भी जब इस दिन लालकिले पर लहराते हुए तिरंगे को देखते हैं तो लोग उतने ही गर्वित होते हैं जितना आजादी के समय हुआ करते थे और जब बैंड के साथ राष्ट्रीय गान की धुन कानों में पड़ती है तो दिल में देश के प्रति समर्पण का भाव स्वतः ही उमड़ पड़ता है और इसी के साथ ही याद दिलाता है भारत के अनेक वीरों को जिनके अथक प्रयासों से हमें कभी मुगल तो कभी अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली।      भारतीयों का स्वतंत्रता दिवस में इसप्रकार से खुश होना, गर्वित होना, उमंग से भर जाना बड़ा ही सामान्य है क्योंकि प्रत्येक नागरिक चाहे वह किसी भी देश का हो अपने देश के प्रति प्यार और समर्पण का भाव हमेशा दिल में संजोए रखता है और अपने देश भक्ति का ये उत्साह तो तब और भी दुगना हो जाता है जब वह परदेस में हो।     ऐसा ही जज्बा और जोश हमने अभी हाल ही में आयोजित ओलंपिक खेलों में भी दिखाई दिया। जब भारत के खिलाड़ी टोक्यो 202...

तीज... हर सुहागन के लिए खास दिन

चित्र
तीज... हर सुहागन के लिए खास दिन     महिलाओं को सजने संवरने का बस एक मौका चाहिए होता है और बस वे झट से इन मौकों को ढूंढ भी लेती हैं। तभी तो चाहे किसी का ब्याह हो या जन्मोत्सव या फिर कोई भी त्योहार बिना श्रृंगार के महिलाओं के लिए ये सभी उत्सव फीके हैं। भारत में तो कितने व्रत भी ऐसे हैं जो महिलाओं को उनके सुहाग और श्रृंगार के बने रहने के लिए हैं।     ऐसा ही एक त्योहार सावन में आने वाले हरितालिका तीज का भी है जो पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य और घर की सुख शांति के लिए होता है। इस वर्ष का तीज व्रत 10 अगस्त की शाम से आरंभ हो रहा है।     हरियाली से प्रेरित इस व्रत का उद्देश्य भी प्रकृति की भांति सुहाग के हमेशा हरे भरे और फले फूले की कामना के लिए होता है। जहां सुहागिने अपने अखंड सौभाग्य के लिए तो कुंवारी लड़कियां अपने भावी पति की कामना के लिए करती हैं। तीज व्रत की पौराणिक मान्यता   माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी और भगवान शिव ने श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माता पार्व...

केवल भू कानून ही नहीं, बात है उत्तराखंडियत की।

चित्र
केवल भू कानून ही नहीं, बात है उत्तराखंडियत की।     वैसे तो आजकल सभी इतने व्यस्त होते हैं कि किसी को कोई मतलब नहीं होता है कि क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए। मतलब तो तब जान पड़ता है जब खबर सोशल साइट पर घूमते हुए हमें मिल जाती है। ऐसे ही तो आजकल कई लोगों को उत्तराखंड से जुड़े खूब भारी भरकम शब्द भी सुनने को मिल रहे हैं और ऐसा ही एक शब्द इस हफ्ते (27 जुलाई, अमर उजाला) ही एक अखबार में मुझे पढ़ने को मिला,,, उत्तराखंडियत ।      इससे पहले कभी भी मैंने इस शब्द को नहीं सुना था शायद कभी उत्तराखंड के बारे में ऐसा सोचा ही नहीं होगा। लेकिन सच कहूं तो उत्तराखंडियत सुनकर अच्छा लगा। उत्तराखंड में रहते हुए इसे सुनकर ही लगता है कि कोई वजनदार पहचान मिल रही है।       जैसे भारतीय होने पर भारतीयता का गर्व होता है ठीक वैसे ही उत्तराखंड में रहते हुए उत्तराखंडियत की बात करना मतलब की अपनी पहचान को आगे बढाना है। चलो, किसी को तो याद आया कि उत्तराखंड में उत्तराखंडियत का भी कुछ स्थान होना चाहिए, हां, ये बात अलग है कि इस प्रकार के शब्द चुनाव के समय में ही ...

सावन में भोले की भक्ति Worship of Lord Shiva in Saavan (Monsoon)

चित्र
सावन में भोले की भक्ति( बोल बम, हर हर बम।)     सावन का अर्थ केवल प्रेम,पीहर, झूला और हरियाली ही नहीं है बल्कि सावन भक्ति का भी मौसम है इसीलिए तो आपने भी सावन में बहुत से लोगों को भगवान शिव की भक्ति में डूबा हुआ या बोल बम कहते हुए सुना या देखा होगा। ये अलग बात है कि कोरोना संक्रमण के कारण कांवड़ियों पर रोक लगा दी है लेकिन शिव की भक्ति पर कोई रोक नहीं हैं तभी तो सावन मौसम है पावन भक्ति का , भगवान शिव की आराधना का और इसी सावन माह में चारों ओर हरियाली के साथ भगवान शिव की भक्ति का अलग ही आनंद है जो कि भोले भक्त ले ही रहे है।    सावन आरंभ हो चुका है और भगवान शिव को पूजने और प्रसन्न करने का अवसर भी क्योंकि मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना से सभी का कल्याण होता है क्योंकि भगवान शिव सावन के महीने में किए गए पूजन से प्रसन्न होते हैं। सावन के सोमवार का व्रत करने से पुण्य लाभ मिलता है। सावन में भगवान शिव की भक्ति का महत्व क्यों है? सावन माह और शिव का संबंध के पीछे भी एक पौराणिक कथा है।    माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पत...

सबसे मीठा राम का नाम, उसके बाद बस आम ही आम। भारत के प्रसिद्ध आम। हर आम की अपनी अलग पहचान

चित्र
सबसे मीठा राम का नाम, उसके बाद बस आम ही आम भारत के प्रसिद्ध आम। हर आम की अपनी अलग पहचान      तीन महीने बाद घर में हमारे सिवा अन्य लोगों की भी आवाजें सुनाई दी। पिछले रविवार को ही पारिवारिक मित्र से बढ़कर हमारे परिवार के ही लोग जो साथ थे। मां बाबू जी का और इस परिवार का साथ पिछले 30 सालों से है तो घर में खूब चहल पहल होना स्वाभाविक था।     जय की शैतानियां अपने अवि भईया और शुभी चाचु के साथ चरम सीमा पर थी। जिया की खुशी अपनी क्राफ्ट और पेंटिंग वाली चाची के साथ दुगनी हो गई, मां बाबू जी की टोली अंकल आंटी जी के साथ अलग ही रमी हुई थी और     विकास को तो बस और चाहिए ही क्या था क्योंकि,,अपना बचपन का यार (partner in crime) जो साथ था और इन सबके बीच मुझे तो बस सबको साथ देखकर जो आनंद मिल रहा था उसका अंदाजा तो इस बात से भी लगाया जा सकता है कि खुशी के मारे परोसने वाला एक व्यंजन भी मुझे देखकर फुक गया।    खैर, जब परिवार बड़ा होता है तो इस प्रकार की बाते साधारणत: हो जाती हैं। असाधारण बात तो तब मानी जाए कि जब परिवार एक साथ बैठा हो ...

मानसून में बालों की देखभाल Hair care in monsoon

चित्र
मानसून में बालों की देखभाल Hair care in monsoon     बरसात आने का मतलब है, प्रेम, खुशी, ढेर सारी मस्ती,  चटपटे व्यंजन और गीत मल्हार। इस मौसम में चारों तरफ हरियाली होती है और प्रकृति को ऐसे देखकर आंखों को सुकून मिलता है और दिल भी गुनगुनाने लगता है।इस मौसम की प्रतीक्षा तो हर कोई करता है चाहे पेड़-पौधे हों, पशु-पक्षी हों या फिर इंसान।      मई जून की तपती गर्मी से अब जुलाई की बारिश से राहत मिल पाएगी लेकिन लेकिन साथ ही उमस, पसीना, नमी वाली गर्मी से भी कई बार सामना हो रहा है। इन ऋतुओं के बदलाव के समय हमारे शरीर पर भी तरह तरह के प्रभाव पड़ते हैं चूंकि बरसात में कई बैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे माइक्रोब्स बारिश की नमी के कारण सक्रिय रहते हैं इसलिए तो बरसात के समय संक्रमण का खतरा भी अधिक होता है।   इन सबके बीच एक समस्या और भी बनी रहती जो बहुत ही सामान्य है और वह है, बालों की इसीलिए मानसून में उचित खानपान के साथ उचित देखभाल भी जरूरी हो जाती है । फिर चाहे शरीर की देखभाल हो या बालों की।     आजकल मैं भी बालों की समस्या से जूझ रहीं हू...

बच्चों का लोकल गोवा बीच (मालदेवता, देहरादून)

चित्र
   बच्चों का लोकल गोवा बीच ( मालदेवता, देहरादून)      वैसे तो दिन रविवार का था लेकिन हलचल सुबह से ही होने लग गई थी। पूरे हफ्ते बच्चे प्रतीक्षा कर रहे थे आज के  इस रविवार की क्योंकि उन्हें पिकनिक पर जो जाना था वो भी गोवा बीच पर। लेकिन बता दूं कि हम गोवा में नहीं रहते हैं और न ही इन छुट्टियों में गोवा गए हुए हैं। हम तो देहरादून में ही रहते हैं और इस कोरोना महामारी के चलते बहुत दिनों से घर से बाहर भी नहीं निकले। लेकिन अभी पिछले हफ्ते से ही बाहर निकलना आरंभ किया है वो भी थोड़ा डर डर कर और  सावधानी के साथ।      अभी बच्चे छोटे हैं तो उन्हें कुछ भी बता दो तो वही धुन पकड़ लेते हैं। जैसे बच्चों को विकास ने थोड़ा गोवा बीच का गुब्बारा पकड़ा रखा है। जिया थोड़ी समझदार है तो उसे समझ में आ जाता है कि गोआ कहां है लेकिन छोटे जय को बस यही पता है कि गोवा में समुद्र होता है, वहां खूब सारा पानी होता है, लोग वहां बड़ी सी हैट पहनते हैं, ठंडा शरबत पीते हैं, गाने सुनते हैं और खूब मस्ती करते हैं और जय ने तो गोवा से जुड़ा एक गाना भी सुना हुआ है औ...