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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

बसंत पंचमी: शुभ दिन संस्कारों का

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बसंत पंचमी: विद्यारंभ संस्कार    अब बसंत आ रहा है और बसंत का आगमन हमेशा से मन में खुशियों की दस्तक देता है क्योंकि इसे वृद्धि का मौसम भी कहा जाता है। इसमें यही कामना की जाती है कि जिस प्रकार बसंत के मौसम में प्रकृति की वृद्धि होती है ऐसे ही जीवन में खुशियों की वृद्धि होती रहे।     प्रकृति माँ की चहुँ ओर फैली रंग बिरंगी ओढ़नी से हमारे मन, मस्तिष्क में सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। इन्हीं प्रभावों से मिली ऊर्जा को एक नई दिशा में ले जाने के लिए ही तो बसंत पंचमी का दिन निर्धारित किया है जो पर्व के रूप में हम मना रहे हैं।    बसंत पंचमी भी प्रकृति माँ पर आधारित है और माँ स्वयं देवी है तो इस दिन देवी का वंदन होना निश्चित है। इस दिन हम माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं जिन्हें हम ज्ञान, विद्या,स्वर, संगीत की देवी मानते हैं। इस दिन से किसी भी कार्य का आरंभ करना शुभ माना जाता है इसीलिए हिंदु संस्कृति में किसी भी संस्कार करने के लिए यह दिन उत्तम माना जाता है। इस दिन जनेऊ संस्कार, कर्ण छेदन संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार और विद्यारंभ संस्कार भी किये जाते ...