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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

साथी की जरूरत है...

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  साथी...     "साँसों की जरूरत है जैसे जिंदगी के लिए हाँ एक सनम चाहिए आशिक़ी के लिए।" ये गाना तो आपने भी सुना ही होगा। जितना  मधुर इसका संगीत है उतने ही अनमोल इसके बोल। अब जिंदगी के लिए जितनी आवश्यक सांस है उतना ही आवश्यक साथ भी है। आशिक़ी तो एक उम्र तक सीमित हो सकती है परंतु साथ उम्र भर तक का होता है। फिर चाहे वो रिश्तों का हो या खून का।    इसीलिए तो साथ न सभी को चाहिए होता है। चाहे वो पति पत्नी का हो, भाई भाई या भाई बहन का या माता पिता का या फिर दोस्त या सहेलियों का साथ। अकेले रहना शायद ही किसी को पसंद हो और अगर होगा भी तो बहुत ही कम समय के लिए ही अकेले रहना भाता होगा क्योंकि साथी के साथ जीवन जिया जाता है और बिना साथ के जीवन केवल कटता है क्योंकि एक समय पर अकेलापन काटता भी है।   अकेला आदमी पूरे दिन भर लोगों से घिरा रह सकता है या पूरे दिन भर अपने कार्यों में व्यस्त रह सकता है लेकिन घर एक ऐसी जगह है जहाँ आप अपने को कितना भी व्यस्त रखें एक समय पर बिना साथ के घर का खालीपन आपको बेचैन कर देता है और अगर लगातार आप खाली हैं बिना साथ के हैं ...