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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

इगास: उत्तराखंड की दिवाली (Igas: The Diwali of Uttarakhand)

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   इगास: उत्तराखंड की दिवाली  9 नवम्बर 2024 से उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष) का आरंभ हो रहा है। इस विशेष अवसर पर हम सिर्फ अपने राज्य की स्थापना का ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सपनों और अटूट जज़्बे का जश्न मना रहे हैं। मन में उल्लास है और विश्वास भी कि उत्तराखंड विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर रहेगा और अपनी अनोखी संस्कृति और परंपराओं को भी संरक्षित रखेगा। आआज का लेख इसी संस्कृति के साथ जुड़ा है, उत्तराखंड का लोकपर्व इगास।     अभी तो दिवाली समाप्त हुई है लेकिन उतराखंडियों के लिए दिवाली की जगमगाहट फिर से आ रही है। शुभ दिन, इगास के साथ।    नवरात्रि से शुभ दिनों का आगमन आरंभ हो जाता है। पहले माँ जगदंबा के दरबार में मन पवित्र होता है उसके बाद प्रभु राम का गुणगान। सच मानो तो त्योहारों की झड़ी लग जाती है और मन में खुशियोँ की फुलझड़ी तो जैसे कभी खत्म ही नहीं होती बस जगमगाती ही रहती है। ऐसे में लगता है कि दिवाली की खुशियाँ कभी समाप्त ही न हो।   जैसे कि दिवाली तो चली गई लेकिन इस फुलझड़ी की जगमगाहट उत्तराखंड में इगास तक रहती है। इगास उत्तराखं...