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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

ल से लट्टू....बचपन का खिलौना

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ल से लट्टू....बचपन का खिलौना    कुछ याद आया! हां हां अपना बचपन का खिलौना, लट्टू। लकड़ी का बना अंडाकार आकार का, जिसके बीच में एक कील रहती थी और उस कील के चारों ओर एक सुतली लपेट कर झटके से खींचते थे और फिर ये लट्टू गोल गोल घूमने लगता था।      पता नहीं जय को कौन कौन सी धुन सवार हो जाती है। पिछले कई दिनों से लट्टू के पीछे पड़ा हुआ है।      जितनी बार हम घर से बाहर निकले उतनी बार "लट्टू लेकर आना" और जैसे ही घर पहुंचे "मेरा लट्टू लाए?" सुनने को मिलता है। हर बार हम यह कहकर टाल देते हैं कि अब ये किसी दुकान में नहीं मिलता है।     पता नहीं हम क्यों भूल जाते हैं कि आजकल बच्चे जितने जिद्दी हैं उतने सयाने भी इसलिए जय ने तुरंत गूगल के कान में कहा "ल से लट्टू" और गूगल ने भी उतनी ही तेजी से अनेकों लट्टू के चित्र दिखा दिए। बस फिर क्या था अब तो लट्टू लाना ही पड़ेगा।   वैसे जितना उत्साही जय है अपने लट्टू के लिए उतना ही उत्साह मुझे भी है लट्टू को देखने के लिए क्योंकि इसे मैंने अपने बचपन के बाद केवल किताब में ही देखा है। बचपन में मोहल्ले...