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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

जिद्दी बेलें...

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जिद्दी बेलें     आज एक बार फिर मुझे अपने घर के पीछे वाली गैलेरी में जाना पड़ा। आज फ़िर से ये लहरा लहरा कर मुझे चिड़ा रहीं हैं। अभी एक हफ्ते पहले ही तो ये मिलीं थी मुझसे। अकड़ीं अकड़ीं सी पतले छरहरे बदन वाली आगे से गोल घुंडिनुमा ताज लिए बढ़ी चले जा रही थी मेरी दीवार पर,ये जिद्दी बेल। इन्हे देख कर लग रहा था की जैसे कोई दुश्मन मेरे किले पर चढ़ाई कर रहा हो और कब्जा करना चाह रहा हो ।      आपको तो याद होगा कि  'खोया पाया तौलिया' में मैंने बताया था कि मेरे घर के पीछे एक गैलेरी है और उसी गैलेरी के पीछे एक खाली प्लॉट है जहाँ हमारे एक पड़ोसी अपनी क्यारी बनाते हैं और बागवानी करते हैं। इसी गैलेरी में घर का कुछ सामान भी है, जैसे कुछ लकड़ी के गुटके, घर बनाते हुए बची हुई फर्श की  टाईल्स, LPG गैस, और मेरी वाशिंग मशीन। और समान को छोड़ भी दे लेकिन वाशिंग मशीन की सहायता तो मुझे हर हफ्ते चाहिए होती है और कभी कभी एक हफ्ते में दो बार भी मैं इसकी सेवाएं ले लेती हूँ।   अभी एक हफ्ते पहले की ही बात है, सुबह वाशिंग मशीन में कपड़े डाले, और कुछ ही देर में मैंने कु...