संदेश

दिसंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है

सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए  शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम ...

सर्दी...शादी...स्वेटर..

चित्र
    सर्दी...शादी...स्वेटर..     शादियों का मौसम है और वो भी सर्दियों में। दुल्हा, दुल्हन बरात, मेहंदी, हल्दी, फेरे, विदाई, दावत, ढेर सारी जगमगाती रोशनी और उन रोशनियों में चमकते चेहरे।    अब दुल्हा दुल्हन के चेहरे की चमक का तो कोई जवाब ही नहीं है। ये उनकी खुशियों की प्राकृतिक चमक है जो उनके चेहरों से अधिक उनकी आँखों में होती है। साथ ही परिवारजन और शुभचिंतकों की खुशियों में भी कोई कमी नहीं होती खासकर कि महिलाओं और युवतियों की जिनकी खुशियों में इतनी गर्माहट होती है कि चाहे कितनी भी ठंड हो बिना स्वेटर या किसी भी गर्म कपड़ों के हर शादी चल जाती है।     जहाँ आदमी और लड़के लोग सूट, स्वेटर, जैकेट, शाल पहने उनके इस साहस को देखकर हैरान होते हैं तो वहीं वृद्ध माताएं तरह तरह के ज्ञान देकर उन्हें घुडाकानें से भी नहीं चूकती। लेकिन क्या करें शादी की चकाचौंध की जो गर्माहट होती है वो बहुत ही नर्म और मखमली होती है  जिसके बीच सच में ठंडक गायब हो जाती है जिसे केवल महिलाएं ही समझ सकती है। और अगर आप उन्हें समझना चाहते हैं तो उसके लिए आप...

प्रकृति: सुनो तो सही!!

चित्र
प्रकृति: सुनो तो सही!!       ऐसा लगता है कि रह रह कर प्रकृति कुछ न कुछ बताने की कोशिश कर रही है या कुछ कहने की और अगर हम न सुने तो फिर ये हमें समय समय पर चेतावनी भी दे रही है कि 'मुझे मत छेड़ो। अगर मुझे छेड़ोगे तो मैं किसी न किसी रूप में अपना बदला लूंगी।' और एक हम लोग हैं जो इन संकेतों को समझ नहीं रहे हैं या यूँ कहा जाए कि इन चेतावनियों को हल्के में ले रहे हैं और फिर से उसी राह में आगे बढ़ जा रहे हैं। ऊपर से अपनी गलतियों को नज़रंदाज कर प्राकृतिक आपदा के नाम पर प्रकृति माँ को ही दोष दे रहे हैं।  क्यों!! मानो या न मानो लेकिन सिलक्यारा टनल का हादसा अभी एक ताजा उधारण है विकास vs विनाश का। ये अवश्य है कि 17 दिन बाद इस सुरंग से सभी मजदूर सकुशल आ गए ये एक बहुत बड़ी जीत है।   हमने इस बचाव कार्य के लिए तरह तरह की तकनीक का उपयोग किया जिसमें हम सफल हुए और आज हम सभी उत्साहित भी हैं कि बिना किसी जन हानि के हमने इस विपदा को काट दिया ये बहुत अच्छी बात है। लेकिन हम ये मानने के लिए क्यों तैयार नहीं हैं कि प्राकृतिक आपदा विपदाओं के सामने हम हमेशा हार...