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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

लीव नो ट्रेस (LEAVE NO TRACE)

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लीव नो ट्रेस (LEAVE NO TRACE)     उत्तराखंड में बारहों मास पर्यटन के अवसर हैं किंतु तीर्थ यात्रा यानी कि चार धाम यात्रा के समय (अप्रैल - अक्टूबर) पर्यटन अपने चरम पर होता है। सप्ताहांत वाला सिद्धांत (वीकेंड थ्योरी) अब केवल मेट्रो या महानगरों का ही नहीं अपितु हर स्थान के यात्री को भाता है तभी तो जहाँ अन्य दिन केवल भीड़ होती है वहीं वीकेंड पर कुछ स्थान पर कुंभ होता है।     जब से यातायात की सुविधा और तकनीकी ज्ञान ने अपनी उड़ान भरी है तभी से पर्यटन को भी नए पंख मिल गए हैं। इसीलिए उत्तराखंड में यात्रा के समय पर्यटकों की भीड़ होना अब सामान्य हो गया है। हजारों लाखों लोग इस समय उत्तराखंड की यात्रा पर निकलते हैं।    खैर! समय चाहे जो भी हो यात्रा तो सभी करते ही हैं और करनी भी चाहिए। और जब उत्तराखंड देव स्थान और अपने नैसर्गिक एवं प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर् है तो यहाँ यात्रियों/सैलानियों का आना सामान्य है।    अगर आप उत्तराखंड में किसी भी तरह की यात्रा या फिर कैंप करने की सोच रहे हैं तो Leave No Trace (LNT) लीव नो ट्रेस को अपनाएं। वैसे इ...