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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

कुछ कहता है 2022...Goodbye 2022

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कुछ कहता है 2022... Self Assessment (आत्म आंकलन)     बस अब कुछ दिन शेष है और नव वर्ष हमारे सामने अपने स्वागत के लिए खड़ा है और हम भी नव वर्ष के आगमन की तैयारी में हैं। इन बचे हुए बाकी के दिनों में हम बस यही कहते और सुनते चले जाते हैं कि "साल कब बीत गया, पता ही नहीं चला!" और पता भी तो कैसे चलेगा क्योंकि हम सभी अपने अपने जीवन में सेकंड की सुई की तरह से चलायमान है। जैसे समय किसी के लिए नहीं रुकता वैसे ही जीवन का पहिया भी लगातार चलता रहता है। तभी तो समय गुजरता रहता है और हम अपने उम्र के सफर में आगे बढ़ते रहते हैं।    नए साल में कदम रखने की खुशी तो सभी को होती है इसीलिए तो लोग अपनी खुशीयां मनाते घर, बाजार, होटल, हिल स्टेशन या पवित्र धामों में दिखाई दे जाते हैं। जहाँ नव वर्ष के आगमन का शोर है वहीं बीता हुआ वर्ष भी कुछ कहता है जिसे सुनना भी जरूरी है।    'गुजरा साल कब बीता पता ही नहीं चला' की रट छोड़कर 'गुजरा साल कैसे बीता'...इस पर एक मनन अवश्य होना चाहिए। क्योंकि आने वाले कल के सुधार के लिए बीते हुए कल की एक झलक जरूरी है।     बीता हुआ ...