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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

हिमालय बचाओ... ये हमारा है।

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हिमालय बचाओ... ये हमारा है।     4 सितम्बर को एक खबर छपी थी कि गंगोत्री ग्लेशियर पीछे खिसक रहा है।    "वर्ष 1935 से 2022 के बीच 87 साल में देश के बड़े ग्लेशियरों में से एक उत्तराखंड का गंगोत्री ग्लेशियर 1.7 किमी पीछे खिसक गया है।"   चौकनें वाली खबर तो थी ही लेकिन सबसे अधिक तो ये हमारे लिए चिंता की बात है। ये केवल एक ग्लेशियर की बात नहीं है ऐसा ही कुछ हाल लगभग हिमालयी राज्यों के ग्लेशियर के साथ भी है। अब तो लगभग हर साल कभी बाढ़ तो कभी सूखा और वनाग्नि की घटनाएं हो रही है।     हिमालय हमारे देश का ताज है। इसके अंगों (ग्लेशियर, पहाड़, नदी, जंगल, जमीन) को गलने से बचाना है क्योंकि यह केवल अध्यात्मिक केंद्र, या साहसिक खेल या केवल फिर रोमांच का स्थान भर ही नही है यह हमारी जीवन रेखा है क्योंकि इसके अथाह प्राकृतिक संसाधनों के चलते ही हम अपना जीवन यापन कर रहे हैं। मनुष्य प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से हिमालय पर निर्भर है। देश के 65 प्रतिशत लोगों के लिए पानी की आपूर्ति यही हिमालय करता है और साथ ही रोज रोटी का प्रबंध भी।     लेकिन हम...