संदेश

देहरादून का दशहरा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सावन विशेष: शिव के प्रिय..

चित्र
सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

बालमन का दशहरा

चित्र
   बालमन का दशहरा     बाल मन पढ़ना बहुत ही कठिन है या यूँ कहो कि उसको समझना अपने बस की बात नहीं है। सुबह से लेकर रात तक तरह तरह के रूप देखने को मिलते हैं। गुस्सा, जिद्द, लाड, प्यार, लड़ाई, बचपना, सयानापन, मस्ती, नादानी और न जाने क्या क्या रूप घड़ी घड़ी देखने को मिलते हैं और इन सभी रूपों से निपटने के लिए मेरा तो धैर्य कितनी बार टूट जाता है लेकिन अगले ही पल दिल को तसल्ली देती हूँ कि ये सब केवल कुछ साल तक ही है। उसके बाद तो बचपन हवा हो जायेगा और फिर बस जिंदगी किसी न किसी रेस में भागती दौड़ती मिलेगी और तब बचपन के यही दिन और रूप याद आयेंगे।      नटखट कम शैतान जय ऐसा ही है जो दिन भर नाक में दम करके रखता है। घड़ी घड़ी उसकी मनमानी चलती रहती है, जिद्द चलती रहती है इसलिए उसे डाँट भी मिलती है और मार भी लेकिन कभी कभी उसके बाल मन की कल्पनाओं से आश्चर्य भी होता है और लाड भी। जैसे आजकल वो राम लीला की कल्पनाओं में उड़ान भर रहा है। अब घर में तो आजकल न रामायण देखी जा रही है और न ही पढ़ी जा रही है लेकिन जय स्कूल से सीख कर जरूर आया है क्योंकि वो स्कूल से राव...