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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

स्वदेशी खादी

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स्वदेशी खादी     नये नये कपड़े पहनने की चाह हमेशा से ही हर दिल में रहती है तभी तो चाहे कितने भी कपड़े हो लेकिन हमारे लिए हमेशा कम ही होते हैं। खासकर कि महिलाएं, जिनके पास घर में कपड़ों के ढ़ेरों विकल्प होते हैं लेकिन समय पर एक भी विकल्प नहीं भाता!! आज बाजार में रंग, फैब्रिक, डिजाइन सब तरह के विकल्प उपलब्ध हैं इसीलिए तो वस्त्र उद्योग आज चरम पर है।     2800 ईसा पूर्व से ही वस्त्रों के विकास की जो झलक सिंधू घाटी सभ्यता से मिली उसने यह सिद्ध कर दिया कि वस्त्र उद्योग भारत के प्राचीन उद्योगों में से एक है। धीरे धीरे समय बीतता गया और तकनीकी ज्ञान के साथ वस्त्र उद्योग भी आगे बढ़ता गया।    भले ही तकनीक और अपने प्रयोगों से तरह तरह के कपड़े बन रहे हैं लेकिन आज भी हाथ से बने हुए कपड़ों का अपना एक विशिष्ट स्थान है। जैसे कि खादी। खादी एक ऐसा स्वदेशी वस्त्र है जो हाथ से कते हुए सूत से बनाया जाता है और जो हमें भारतीयता से जोड़ता है। जिस समय भारत अपनी आजादी के लिए लड़ रहा था। उस समय खादी एक आंदोलन की तरह उभरा जो पूरे भारत में एकता की मिसाल की तरह फैल गया। म...