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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

उत्तराखंड पर्यटन: चारधाम यात्री कृपया ध्यान दें...

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उत्तराखंड पर्यटन: चारधाम यात्री कृपया ध्यान दें...    गर्मियों में धूप के कारण घर से बाहर निकलने का बिलकुल भी मन नहीं होता लेकिन जब बात उत्तराखंड जाने की हो तो सोचना क्या क्योंकि यहां की मौसम, पेड़ पौधे, पहाड़, नदियां आपको उत्तराखंड की ओर आकर्षित करती हैं इसीलिए तो उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है लेकिन सच बात तो यह है कि यह उत्तराखंड देवभूमि है जहां प्रकृति के साथ देव दर्शन भी होते हैं इसीलिए देश विदेश से लोग उत्तराखंड घूमने आ रहे हैं।    उत्तराखंड में यात्रा तो आप कभी भी कर सकते हैं लेकिन हिमालय के चार धाम यात्रा का समय निश्चित होता है। उत्तराखंड में चार धाम यात्रा, गंगोत्री, यमनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ की यात्रा एक निश्चित अंतराल के लिए ही खुलती है इसलिए चार धाम यात्रा के लिए आप उत्तराखंड में कभी भी नहीं अपितु विशेष समय पर ही जा सकते हैं। जब इन धाम के कपाट खुलेंगे तभी उत्तराखंड के इन पावन धामों की यात्रा की जा सकती है।    अक्षय तृतीया 3 मई से ही गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा आरंभ हो रही है। केदारनाथ जी के द्व...