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Showing posts from June, 2021

उत्तराखंड में मकर संक्रांति और पकवान

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उत्तराखंड में मकर संक्रांति का खानपान      नए वर्ष के आरंभ होते ही पहला उत्सव हमें मकर संक्रांति में रूप में मिलता है। इस संक्रति में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इसे मकर संक्रांति कहते हैं। इसको उत्तरायणी भी कहा जाता है क्योंकि सूर्य दक्षिण दिशा से उत्तर की दिशा की ओर आता है। इसलिए आज से दिन लंबे और रात छोटी होने लगती है।  मकर संक्रांति का महत्व:   मकर संक्रांति का महत्व हिंदू शास्त्र में इसलिए भी है क्योंकि सूर्य देव अपने पुत्र जो मकर राशि के स्वामी हैं शनि से मिलते हैं जो ज्योतिषी विद्या में महत्वपूर्ण योग होता है। इसलिए माना जाता है कि इस योग में स्नान, ध्यान और दान से पुण्य मिलता है। वैसे इस दिन भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है क्योंकि कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने इस दिन मधु कैटभ दानवों का अंत किया था।    मकर संक्रांति से ही शुभ कार्यों का आरंभ भी हो जाता है क्योंकि उत्तरायण में हम 'देवों के दिन' और दक्षिणायन में हम रात मानते हैं इसलिए मांगलिक कार्यों का आरंभ आज से हो जाता है।    यहां तक कि माना जाता है कि उत्तरायण में मृत्यु से श्री चरणों में म

पानी पिएं और वजन घटाएं Drink water and lose weight

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पानी पिएं और वजन घटाएं   आज किसी अभिनेता से पूछो या किसी सेलेब्रिटी से डॉक्टर की सलाह लो या फिर बड़े बुजुर्गों का नुस्खा। एक बात सभी के साथ बड़ी सामान्य है की सभी एक राय में सहमत हैं कि पानी के भरपूर सेवन से हमारा स्वास्थ्य बना रहता है। जब भी कभी बुखार या कोई संक्रमण होता है तो यही परामर्श दिया जाता है कि खूब पानी पियो। कोरोना कीइस महामारी में भी संक्रमण के समय रोगी को 3 से 4 लीटर पानी पीने की सलाह दी गई थी।     कुछ दिन पहले आपने भी शायद एक वीडियो देखा होगा क्रिस्टियानो रोनाल्डो का। इस सुप्रसिद्ध फुटबाल खिलाड़ी ने प्रेस कांफ्रेंस में अपने सामने से कार्बोनेटेड पेय (कोक) को दूर करते हुए पानी पीने का बढ़िया संदेश दिया था। अब इससे कंपनी को तो कई हजार करोड़ का नुकसान तो हुआ होगा लेकिन कई करोड़ लोगों को पानी पीने का संदेश भी मिला।      हमारे शरीर का 70% भाग पानी ही है और यह शरीर का तापमान भी नियंत्रित रखता है। पानी पीना शरीर के लिए अति उत्तम है और पानी की उचित मात्रा से रोग का नाश तो होता ही है साथ ही शरीर स्वस्थ भी बना रहता है। आज के समय में बहुत से लोग वाटर थैरेपी से अपना कई

पेट की चर्बी (Belly Fat) घटाने का पंचयोगासन(केवल 15 मिनट)PanchYogasana to reduce belly fat (15 minutes only)

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पेट की चर्बी (Belly Fat) घटाने का पंचयोगासन PanchYogasana to reduce belly fat (15 minutes only) प्रतिदिन 15 मिनट: स्वस्थ पेट और लचीली कमर के लिए    स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन आज के समय का सबसे बड़ा धन है और यह धन भला किसे नहीं चाहिए। शायद यही कारण है कि आज योग को पूरा विश्व अपनी जीवनशैली का एक अंग बना रहा है तभी तो हर साल 21 जून को विश्व के करोड़ों लोग एक साथ विश्व योग दिवस मनाते हैं।      वैसे तो मैं प्रतिदिन ही 40 से 45 मिनट योग और व्यायाम करती हूं जिसमें मैं अपने पूरे शरीर का ध्यान रखती हूं लेकिन कोरोना संक्रमण के बाद से शरीर में कुछ बदलाव भी आए। इसीलिए मेरे लिए 15 मिनट का योग के आसन केवल पेट की चर्बी कम करने के लिए और उचित पाचन के लिए करना आवश्यक हो गया है।       बता दें कि व्यस्त और आधुनिक जीवनशैली में भी अगर हम अपने 15 मिनट भी योग को देते हैं तो इसका लाभ हम शीघ्र ही स्वयं अनुभव करेंगे। अगर संतुलित आहार के साथ इन योगासनों का अभ्यास किया जाता है तो हमें निश्चित ही सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।        योग भारत की प्राचीन सभ्यता की देन है और पौराणिक काल से ही योग किया

पर्यावरण नियम सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए (Environmental rules for a safe and healthy future)

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पर्यावरण नियम: Reduce, Re-use and Recycle   पिछले हफ्ते एक दिन फोन देखकर बहुत खुशी मिल रही थी क्योंकि हर कोई अपनी फोटो लगा रहा था। वैसे तो अपने दोस्त और बंधुओंकी फोटो देखकर हमेशा अच्छा ही लगता है लेकिन इन फोटो में एक खास बात यह थी कि हर किसी की फोटो में प्रकृति की रक्षा का संदेश था।     सच में,  बहुत अच्छा लगता है जब किसी को देखती हूं कि वो अपनी बागवानी में पौधों के बीच में है, कोई फूलों के साथ है, कोई बेलों की देखभाल में लगा हुआ है, किसी ने घर के आंगन में पौधा लगाया तो किसी ने छत पर किचन गार्डन बनाया। सच में, ऐसा लगा कि सभी को पर्यावरण की चिंता है तभी तो सभी लोग प्रेरित कर रहे हैं कि धरती को बचाओ और पेड़ पौधे लगाओ।       यह दिन था 5 जून का जिसे हम सभी विश्व पर्यावरण दिवस (world environment Day) के रूप में मनाते है। पर्यावरण दिवस अपने आसपास के पर्यावरण को स्वस्थ, सुरक्षित और संरक्षण रखने के लिए एक जागरूक अभियान है। इस वर्ष का विषय ही पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली है जिसे संयुक्त राष्ट्र ने एक दशक तक 2021- 2030 तक मनाने का लक्ष्य रखा है।             पारिस्थ

आयुर्वेद: विश्व की प्राचीन चिकित्सा पद्धति Ayurveda World's oldest medical system

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आयुर्वेद: विश्व की प्राचीन चिकित्सा पद्धति  Ayurveda :  World's oldest medical system केवल रोग के लिए ही नहीं अपितु स्वस्थता के लिए भी....     पिछले कुछ दिनों से समाचार पत्र, टीवी और सोशल साइट में बस आयुर्वेद और एलोपैथ की बाते हो रही है। कोई आयुर्वेद तो कोई एलोपैथ के गुण गा रहा है। जहां एलोपैथ के कुछ दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं तो वहीं आयुर्वेद को एक लंबी चिकित्सीय प्रक्रिया बताया जा रहा है। किसी के लिए एलोपैथ नवीन चिकित्सा पद्धति है और आयुर्वेद एक पुराना अंधविश्वास और किसी के लिए आयुर्वेद स्वस्थ जीवन का आधार है तो एलोपैथ केवल रसायनों का मिश्रण।   इस महामारी के समय में इन दोनों ही चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोगों का आपस में इस तरह से खींचतान करना क्या उचित है?? नहीं न!!    इन सबके बीच कल जब बेटी के पूछने पर मैं एलोपैथी और आयुर्वेद की परिभाषा बताने लगी तो उसकी बातों से स्वयं भी थोड़ा उलझन में पड़ गई क्योंकि बच्चों के प्रश्न और उनकी जिज्ञासा बड़ों से अधिक होती है।      वैसे तो आम चलन में इतना तो पता ही है कि अंग्रेजी दवाई और अंग्रेजी इलाज पद्धति एलोपैथ में आती है जैसे दर्द,