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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

योग: स्वयं और समाज के लिए

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योग: 'स्वयं और समाज के लिए योग'   आज योग शब्द से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है, इसके लाभ आज समस्त विश्व पूर्ण सहमति से मानता है इसीलिए इसके महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र के 177 देशों ने अपनी मुहर लगाई और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का संकल्प लिया। योग के द्वारा स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली अपनाने के लिए देश-दुनिया के लोग 21 जून को योग से जुड़ते हैं। योग सभी के लिए है। धर्म, जाति या लिंग के बंंधन से परे  यह आज के समय में सभी के लिए एक आवश्यक अभ्यास है क्योंकि इससे व्यक्तिगत विकास तो होता ही है साथ ही सामूहिक रूप से भी समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी को जानकर  संपूर्ण मानव जगत के कल्याण के लिए इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2024) का विषय (थीम) है, 'स्वयं और समाज के लिए योग' (Yoga for Self and Society) स्वयं और समाज के लिए योग    योग तो स्वयं अपने आप में एक वृहद विषय है जो केवल शारीरिक स्वास्थ्य को ही नहीं अपितु आंतरिक स्वास्थ्य पर भी केंद्रित है। योग एक कला है जिसके निरंतर अभ्यास से मानव का सर्वांगीण विकास ...