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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

स्कूल का खुलना...चैन की सांस..Reopening of Schools

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स्कूल का खुलना...चैन की सांस स्कूल का पहला दिन   रात में घड़ी घड़ी नींद से जागना फिर मोबाइल में समय देखना और फिर दोबारा सो जाना। बस यही क्रम पूरी रात भर चलता रहा और जब सुबह उठी तो अलग ही उलझन हो रही थी। कभी यहां कभी वहां करते हुए घर के बस चक्कर ही लग रहे थे काम तो निपट ही नहीं रहा था। सब कुछ आधा अधूरा था, जो काम कुछ मिनटों का था पता नहीं किस हड़बड़ाहट में घंटा भर लग रहा था। आज कुछ खास था।   आज जय का पहला दिन था उसके स्कूल जाने का शायद इसीलिए मैं कुछ बावली सी हो रखी थी और शायद यही हाल उन सभी मां का भी हो जो पहली बार अपने बच्चे को स्कूल भेज रही हो और उनका भी जो पूरे दो साल के बाद अपने बच्चों को स्कूल के हवाले कर रही हो क्योंकि जितने बच्चे अपने स्कूल जाने में उत्सुक थे उतने ही उत्सुक उनके अभिभावक भी थे। वैसे जिया के समय भी ऐसा ही उत्साह था बस शंकाएं नहीं थी लेकिन जय के साथ उत्साह और शंका दोनों थी क्योंकि कभी उसको अकेला नहीं छोड़ा। अगर जय थोड़ी देर भी शांत रहता है तो लगता है कि ये जरूर कुछ उटपटांग ही कर रहा होगा। और ऐसा ही अन्य मां भी सोच रही होंगी जिनके बच्चे अधिक नट...