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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

थोड़ा खाएं पर ताज़ा खाएं।

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थोड़ा खाएं पर ताज़ा खाएं। हम सभी को ज्ञात है कि गर्मियों में खानपान जितना सादा, सुपाच्य और हल्का हो उतना ही अच्छा है और भोजन ताजा खाया जाए वो ही स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा है। किंतु फिर भी हम लोग कई बार अपनी आदतों या अपने आलस या फिर समय की कमी या फिर अन्य कारणों से बासी भोजन करते हैं जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।    क्योंकि ताज़े भोजन में हमें जो पोषक तत्व मिलते हैं वो बासी भोजन से नहीं मिलते। उनसे केवल पेट भरा जा सकता है, स्वस्थ शरीर नहीं। इसके उलट बासी खाने से कई प्रकार के उदर (पेट) रोग हो जाते हैं। इसलिए थोड़ा खाओ लेकिन ताज़ा खाओ। बासी खाना किसे माना जाए: बचा हुआ खाना (leftover food) कुछ समय के बाद बासी कहलाता है साथ ही हम कह सकते हैं कि पकाए हुए भोजन के 3 घंटे के बाद जो बचा हुए खाना हो उसे बासी मान लेना चाहिए। सुबह की बनाई सब्जी दोपहर में खाने पर बासी मानी जाती है। यानी की एक पहर के बाद भोजन बासी हो जाता है।   क्यों न करें बासी भोजन का सेवन:    ताजे भोजन करने से आवश्यक पोषक तत्व और विटामिंस शरीर को मिलते हैं जबकि इसी भोजन...