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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

मेरा सूरज

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मेरा सूरज रसोई से गुनगुनाने की आवाज़ आती है: "मेरा सूरज है तू, मेरा चंदा है तू, आ मेरी आँखों का तारा है तू.."  माँ..। माँ, मैं जा रहा हूँ। (सूरज अपने जूतों के फीते बाँधते हुए )  अरे लेकिन कहाँ,, आज संडे के दिन। वो भी इतनी सुबह सुबह। कम से कम, आज तो शांति से घर बैठ।   माँ तुम्हारे प्रेशर कुकर की सीटी भी तो संडे हो या मंडे, सुबह से शाम तक बजती रहती है। आप कभी शांत नहीं बैठ सकती क्या?  क्या बोलता रहता है। मैं तो बस पूछ रही हूँ।  तुम्हें पता तो है फिर भी हर बार टोकती हो। कितनी बार बताऊँ कि हर सन्डे की सुबह 6 - 9 हमारा क्रिकेट मैच होता है।  पता है लेकिन तु तो 12 बजे से पहले कभी घर आता ही नहीं है इसीलिए बोल रही हूँ कि आज तो तू 10 बजे तक हर हाल में घर पहुँच जाना नहीं तो नाश्ता नहीं मिलेगा और हाँ, पापा की डाँट अलग से मिलेगी। तुझे भी और मुझे भी।  ओह हो! हर बार पापा के नाम से डराती रहती हो। माँ आपका ज्ञान न संडे की सुबह से ही शुरू हो जाता है।   मेरे चंदा मेरे सूरज,,,तुझे पता है सुबह-सुबह मां की आवाज का कानों में जाना शुभ होता है। चल अभ...