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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

मेरे ब्रदर की दुल्हन (गढ़वाली विवाह के रीति रिवाज)

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मेरे ब्रदर की दुल्हन (गढ़वाली विवाह के रीति रिवाज)    कल यानी 21 नवंबर को मैं आई और आज बड़ी दीदी क्योंकि माइके में भाई की शादी है और घर में रौनक तो बेटियों से ही होती है। इसलिए कुछ दिन पहले आना तो बनता ही है। इसबार जिया को घर ही छोड़ना पड़ा क्योंकि जैसे यहां की रौनक बेटियां हैं वैसे ही वहां की रौनक जिया है। दादा दादी की लाडली और अपने पापा की प्यारी है जिया इसलिए मेरे घरवाले अपने से दूर भेजते हुए हमेशा कंजूसी करते हैं।   28 की शादी है लेकिन घर में मांगलिक कार्य का आरंभ 26 से शुरू है। कपड़े लत्ते, मिठाई पिठाई, पूजा पाठ सब काम का शुभारंभ हम सब बड़े आनंद से मिलजुलकर कर रहे हैं। यहां ऋषिकेश सिर्फ मेरा मायका ही नहीं है अपितु मायके की पूरी बारात है। हमारे घर के साथ ही मेरे तीन भाई का परिवार भी है और मेरी तीनों बहनें भी ऋषिकेश में ही हैं इसलिए मेरे लिए मायके आना हमेशा से ही किसी उत्सव में भाग लेने जैसा रहता है और जब दो बहनें एक साथ एक जगह हो तो अन्य बहनों का मन कहां मानने वाला होता है इसलिए क्रमश: बड़ी दीदी के बाद छोटी दीदी और उसके बाद मेरी छोटी बहन भी अपने छोटे बच्च...