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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

बाल:- कच, केश, कुन्तल (लोम्बा लोम्बा चूल , long hairs)

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   मनुष्य अपने हर एक अंग से प्यार करता है। प्यार से कहीं अधिक शरीर के अंगों पर अपना अधिकार होता है, जिसे हम कहते हैं कि ये मेरा है। ईश्वर ने बड़े ही तसल्ली से मानव रचना की है। हर एक अंग को सिर्फ बनाया ही नहीं अपितु उस अंग का कार्य भी निश्चित किया है। तभी तो जब सृष्टि का निर्माण हुआ तो सबसे खूबसूरत संरचना मानव को ही माना गया। ईश्वर की ये कला हाथ से अधिक दिमाग की रही है क्योंकि सिर्फ बहरी रंग रूप से कहीं अधिक तो अंगों की कार्यप्रणाली का कार्य था।  वो कहते हैं न कि बाहर से अधिक अंदर का काम जटिल होता है। वैसे ही हमारे नैन नक्श कद काठी रंग रूप से कहीं अधिक तो हमारी भीतरी संरचना है।    आँख नाक कान आदि अंग मानव में बाहर से दिखते हैं लेकिन हमें दिखाई क्या और कैसा दे रहा है उन सभी का निर्धारण तो हमारे मस्तिष्क और आँख की आंतरिक कार्य से होता है। दिल बनाया, फेफड़े बनाये, उदर बनाया, लिंग बनाया, मेरु तंत्र बनाया,अंत:स्रावी ग्रंथियां बनाई, यहाँ तक की पाचन रस तक बनाया की जो कुछ भी खाओ सबको सहन करो, पौष्टिक तत्व खून में और व्यर्थ तत्व शरीर के बाहर। ऐसी वैज्ञानिक सो...