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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

साल में एक बार (short story)

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साल में एक बार (once in a year) मनीष कहाँ है?? वो चल रहा है न हमारे साथ?? . .. अशोक ने सरिता से उत्सुकता से पूछा अपने कमरे में और आप भी न! बार बार पूछने से उसका जवाब थोड़ी न बदलेगा। आपको पता तो है कि वो कहाँ मानता है ये सब। उसको पूजा पाठ, श्राद्ध सब दूसरी दुनिया की बातें लगती हैं।   हमारे साथ गया चलता तो गया जी का महत्व पता चलता कि वहाँ जाकर पिंडदान करने से 7 पीढी़ और 108 कुलों का उद्धार हो जाता है, मोक्ष मिलता है। वहाँ जाकर शायद मनीष के विचार भी बदल जाते और मुझे अपने बुढापे की तसल्ली भी हो जाती।  रहने दीजिये, आप मनु के साथ कोई जिद्द न करें... जिद्द नहीं है,,अधिकार है हमारा। (अशोक ने सरिता की बात काटते हुए कहा... )   कोई बच्चा थोड़ी न है वो जो जबरदस्ती उठा के ले चले अपने साथ। शादी होने जा रही है उसकी। बहु लेकर आ रहा है हमारा मनु।  (अशोक सिर झटकते हुए ) पता है, फ़िरंगन बहु।   सुनो जी, मैं मानती हूँ कि बहु अमरीका में पली बढ़ी हैं लेकिन जेनी को फ़िरंगन बहु कहना शोभा नही देता। आप चाहे जो भी बोलो लेकिन उसके दादा तो भारतीय ही हैं और सबसे अच...

कौन बदला: शिक्षा, शिष्य या शिक्षक!!

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कौन बदला: शिक्षा, शिष्य या शिक्षक !!   शिक्षा के माध्यम से ही ज्ञान मिलता है और ज्ञान से मानसिक चेतना। इसी मानसिक चेतना के विस्तार से एक साधारण मन भी एक जिज्ञासु बनता है जो नई दिशा, ज्ञान, नये विचार, नई सोच, नये उद्देश्य और नई तकनीक का जन्मदाता है। और इन्हीं सब सकारात्मक कड़ियों को जोड़कर ही एक नये शिक्षित समाज का निर्माण होता है।    शिक्षा से शिक्षित समाज तक की दूरी को पाटना हमारी अपनी जिम्मेदारी है लेकिन एक अच्छी शिक्षा से जुड़ने की जिम्मेदारी शिक्षक के कंधे पर ही है इसीलिए जैसे शिक्षा एक आवश्यकता है वैसे ही शिक्षक भी हमारे विकासक्रम की एक मूलभूत आवश्यकता है। हम सभी मानते हैं कि बिना शिक्षक के शिक्षा दिशाहीन है।    लेकिन आज हमारे सामने शिक्षा, शिष्य और शिक्षक संबंधित ऐसी बहुत सी अप्रिय घटनाएं घटित हो रही हैं जो हम सभी को सोचने में मजबूर कर देती हैं कि आज शिक्षा का स्तर क्या है?? ज्ञान का केंद्र कहे जाने वाले देश में आखिर कौन बदला?? शिक्षा, शिष्य या शिक्षक!!   बच्चों द्वारा की जाने वाली आत्महत्यायें उनके लिए पढाई का बोझ थी या फिर आगे बढ़ने...