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सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

अमृत महोत्सव में जन्माष्टमी

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अमृत महोत्सव में जन्माष्टमी देश को कृष्ण चाहिए...     भारत अपनी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक गौरव और विवधता में एकता के लिए जाना जाता है। यहाँ पर्व त्यौहार, गीत संगीत मेले समय समय पर आकर हमें आपस में जोड़ते रहते हैं और इस बार अगस्त का जो यह समय है वो तो लगता है अपने साथ पर्वों की गठरी बांधे आया है। रक्षा बंधन आया, घी संक्रांत आया, ७६वां स्वतंत्रता दिवस आया और साथ ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी भी। अब इन सब त्योहारों के चलते तो बस एक ही विचार आता है कि हमारे लोक पर्व हो या राष्ट्रीय पर्व सभी के लिए उल्लास, ख़ुशी, उमंग और सम्मान एक जैसा ही है। हमारे सारे पर्व ही भारत कि संस्कृति और सभ्यता को समेटे हैं।    भारत को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष हो चुके हैं और इसकी ख़ुशी इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस पर सभी के चेहरों से लेकर घर तक नज़र आई। सरकार ने तो इन 75 वर्षों कि खुशी आज़ादी का अमृत महोत्सव नाम से मार्च 2021 से ही आरम्भ कर दी थी लेकिन हर हिन्दुस्तानी के लिए ये महोत्सव तो 15 अगस्त 1947 से ही आरम्भ हो गया था क्योंकि हमें आज़ादी यूं ही नहीं मिली। इसके लिए हमारे स्वतंत्रता सैनानियो...