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Showing posts from September, 2020

देहरादून: बदलता मौसम...

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देहरादून: बदलता मौसम...    चलो अब तो बारिश हुई और अब जाकर कुछ ठंडक मिली है नहीं तो गर्मी से सब सूख रहे थे। वैसे गर्मियों के दिन है तो गर्मी पड़ेगी ही लेकिन इतनी गर्मी पड़ेगी इसका अंदाज़ा नहीं था। हालांकि हर वर्ष यही कहा जाता है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल बहुत गर्मी है लेकिन सच में देहरादून में ऐसी गर्मी का अनुभव पहली बार ही हुआ क्योंकि भले ही देहरादून में तीन चार दिन जलनखोर गर्मी हो लेकिन उसके अगले दिन ठंडक देने बरखा रानी आ ही जाती थी। मगर जाने क्या हुआ इस बार कि बारिश को आते आते 15-20 दिन लग गए लेकिन देर से ही सही अब राहत मिली है क्योंकि बारिश के बाद गर्म मौसम यहाँ उमस नहीं अपितु ठंडा कर देता है।    यहाँ के मौसम का मिजाज ऐसा है कि बस एक बारिश की फुहार और फिर तपने वाला देहरादून ठंडक वाली दून घाटी में बदल जाता है। इसलिए कहा जाता है कि देहरादून के मौसम का कुछ पता नहीं चलता, कब पलट जाए। तभी तो कब से उम्मीद लगा के बैठे थे कि देहरादून का पारा तीन- चार दिन बढ़ते बढ़ते अब तो पलटी मार के नीचे लुढ़क ही जायेगा लेकिन इस बार हमारा ये ख्याल हवा हो गया। देहरादून जो हमेशा से अपने ख

हम आपस में बहनें है।

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हम आपस में बहनें है।          ये लेख है बहनों के आपसी संबंध के लिए और बहन होने के महत्व के लिए (This article is for the mutual relation of sisters and for the importance of being a sister)    बहिन/ बहिना/ बहन चाहे कुछ भी बोलो किंतु इस रिश्ते का मोल किसी भी तरह के शब्दो के मायाजाल से घटाया या बढ़ाया नही जा सकता। बहन चाहे एक ही माता- पिता के खून से हों या फिर रिश्तों से, एक धागा हमेशा बहनों को जोड़े रखता है और वो है प्रेम और स्नेह का। बहनों के मध्य आपसी प्यार और समझ की बैठक कभी हंसी ठिठोली तो कभी कभी बहुत बड़ी सीख भी देती है। कोई भी स्त्री अपने बचपन का स्मरण करती है तो अपनी ही यादों की गहराई में डूबती जाती है और इन यादों की गहराई को किसी भी पैमाने से मापा नही जा सकता।       वैसे तो हर किसी का बचपन शरारत भरा ही होता है लेकिन घर में अगर बहने साथ साथ की हो तो उनका बचपन तो और भी रंगो भरा हो जाता है क्योंकि हर बहन को एक सहेली तो अपने ही घर परिवार में मिल जाती है। कभी आपस में खूब प्यार से रहना, तो कभी खतरनाक गुस्सा हो जाना, मन में आया तो अपनी टाफ़ी चॉकलेट साझा करना नही तो कभी एक

"पति पीता है, लेकिन पीटता नहीं ।। "

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पति पीता है, लेकिन पीटता नहीं ।।         "Weekend आने वाला है,,,"         कितना अजीब है ना, ' पीता ' या ' पीना' इन शब्दों से ही हमारा दिमाग कितना दौड़ने लग जाता है, बिना किसी और इशारा किए, सीधा बता देता है कि इन शब्दों का अर्थ ' किसके '  सेवन से है और इसका कौन सा रूप है? अब वो तो आप अपने स्वादानुसार या सोचानुसार  या जेबानुसार समझ सकते हैं। शायद आपके साथ भी कुछ इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग हुआ होगा। कुछ वाक्य ऐसे हैं जिनसे आप समझ ही जाते हैं कि यहाँ क्या पीया जा रहा है? जैसे की,,,  " लगता है आज पी कर आए हो, पीया हुआ है क्या, यार, बहुत समय से नही पी, पीने का भी अपना मज़ा है, तुम्हे क्या लगा मैं पी कर आया हूँ, पियो और पीने दो"           ऐसे अनगिनत वाक्य हैं, जिन्हे हम  अमूमन सुन ही लेते हैं। और जिनका अर्थ भी हम समझ जाते हैं कि किसी ' पानी या फलों के रस ' पीने से तो कदापि नही है। फिर भी एक फल का रस तो है ही, चलिए समझदार को इशारा काफी है, और इस शब्द ने तो सबको समझदार बना दिया है और ना जाने कितनो को अपना दीवाना भी। हाँ, लेकिन अब तो कुछ

तमाशा बनती डिग्री या तमाचा मारती बेरोजगारी

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तमाशा बनती डिग्रियाँ  या  तमाचा मारती बेरोजगारी        अभी कल ही एक विज्ञापन देखा जिसे एक  शिक्षित महोदय ने मुझे भेजा था। ये एक विज्ञप्ति थी नौकरी के लिए जिसे देश के एक बहुत बड़े प्रतिष्ठित संस्थान ने प्रकाशित किया था जिसमें नौकरी के लिए सिर्फ एक ही व्यक्ति की आवश्यकता थी , और अगर वेतन की बात की जाय तो एक आम युवा के लिए तो बहुत सी जरूरत पूरी हो सकती हैं शैक्षिक योग्यता के लिए भी आपको सिर्फ स्नातक होना काफी है , उसके लिए आप चाहें तो B. A./B.Com./B.Sc ही क्यों ना हो। हाँ एक और खास बात है अगर B.Tech . या फिर इसके समानांतर कोई दूसरी डिग्री भी हो तो वो भी अपना आवेदन इस नौकरी के लिए कर सकता है। अब हमारे मन मे थोड़ा सा विरोधाभास प्रश्न भी जागृत हो जाता है कि ऐसी कौन सी नौकरी है ? जहाँ शैक्षिक योग्यता   B.A. के साथ साथ B.Tech. को भी आमंत्रण मिला है। तो आपको बताना चाहूँगी कि ये पद है , 'Dog Handler' का। जी हाँ , कुत्ते को संभाल