सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

नेता जी का overtime

   नेता जी का overtime
     गिरती हुई बल्लियों से लगा कि आखिरकार आज तो राहत मिल जायेगी क्योंकि बल्लियों पर टंगे हुए भैय्या जब रस्सियों को खोल रहे थे तो पता चल गया कि आज राज्य के विकास की चर्चा परिचर्चा समाप्त हो चुकी है और नेता जी अब अगले विधान सभा सत्र में क्या क्या विकास के विषय होंगे, उन पर ध्यान लगाएंगे। 
    विकास का तो पता नहीं लेकिन चलो इस विधानसभा सत्र के दौरान सब नेता लोगों की राजी खुशी का पता तो चल ही जाता है। नहीं तो आम जनता को भला इस सत्र के दौरान और मिलता क्या है?? 
  अरे हाँ, ट्रैफिक जाम भी तो इसी सत्र में मिलता है। खैर! हम तो इसी में संतुष्ट हो जाते हैं कि चलो नेता जी को हमारी चिंता है इसी लिए सत्र में आते हैं लेकिन नेता जी थोड़ी सी चिंता और कर लें तो इस सत्र के दौरान होने वाले ट्रैफिक से भी हमें उबार लें। हाँ ये चिंता थोड़ी सी कष्टकारी हो सकती है लेकिन जब नेता जी जनता की सेवा के लिए ही हैं तो क्या थोड़ा सा कष्ट उठाया जा सकता है?? 

  गुस्ताखी माफ, लेकिन अगर ये सत्र रात में चले तो!!

मतलब कि वैसे तो नेता जी हमेशा ही जनता की ड्यूटी में होते हैं लेकिन सत्र के समय थोड़ा सा over time अगर कर लें तो!! तो शायद सत्र के समय लगने वाले जाम से जनता को थोड़ी राहत मिल सकती है।
   विधान सभा सत्र अगर रात में चले तो आम जनता को नेता जी के आश्वासनों के साथ साथ थोड़ी जाम से भी राहत मिल सकती है। दिन भर के काम कम से कम थोड़ी राहत से निपटाए जा सकते हैं। वैसे तो दून का ट्रैफिक बढ़ ही रहा है लेकिन सत्र के दौरान तो आम लोगों के साथ साथ पुलिस के भी धूंएं निकल जाते हैं । 
  इसलिए नेता जी अपना दिल बढ़ा करें तो आम जनता कम से कम समय से अपने ऑफिस और घर पहुंचे, या बच्चे अपने स्कूल से घर और बीमार अस्पताल। यहाँ समय का ध्यान केवल नेता जी का है ताकि नेता जी को बिना देरी किए और बिना किसी ट्रैफिक में फसें विधान सभा अपनी हाजिरी समय पर लगाने जाना है। (आम जनता की हाज़िरी जाए भाड़ में!! ऐसा तो हमारे नेता जी बिल्कुल नहीं सोचते हैं।)  
 आप भी मानते हैं न कि नेता जी को जाम की परेशानी न हो इस का ध्यान हम सभी को रखना है लेकिन साथ ही जनता की परेशानी का ध्यान नेता जी को। इसीलिए आदत डाल लो कि अगली चर्चा परिचर्चा में भी चुपचाप ट्रैफिक में रेंगते हुए जाना है और फिर जब बेरिकेडिंग खुले तो मुस्कुराते हुए नेता जी को धन्यवाद देना है। 


Pic sources: Google

एक -Naari

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