सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

गायब होता संतोष ...

गायब होता संतोष...
  मजदूरों की झोपड़ी से गाने की आवाज आई और उस भजन को सुनते ही कुछ याद आया। बस फिर क्या था ! फिल्म तो याद आई ही साथ ही माता का यह रूप भी याद आया। 
  बहुत सालों पहले एक फिल्म आई थी 'जय संतोषी मां'। ये उस समय की शोले जैसी फिल्म की तरह ही ब्लॉक बस्टर थी। जब लोग इस फिल्म को देखने सिनेमा हाल जाते थे तब अपने जूते चप्पल भी बाहर उतारते थे और जब फिल्म में माता संतोषी का आगमन होता था तो फूल और सिक्के भी पर्दे की ओर उछालते थे। 
   और जब 'जय संतोषी मां' फिल्म दूरदर्शन पर आई तो लोग हाथ जोड़े फिल्म को देख रहे थे और जैसे ही माता के दर्शन होते सभी जय संतोषी माता के नारे लगाते। इस फिल्म में तो साधारण से किरदार निभाने वाले अभिनेताओं को भी खूब प्रसिद्धि मिली। 
  चित्र आभार: गूगल

    हालांकि माता संतोषी की पूजा अर्चना मुख्यत: उत्तर प्रदेश में ही की जाती थी लेकिन इसके बाद उनकी महिमा से कोई अछूता नहीं रहा और उसके बाद क्या उत्तर और क्या दक्षिण। माता संतोषी की पूजा पूरे देश में होने लगी। 
  घर की सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण करने के लिए 16 शुक्रवार का व्रत करते थे। स्नान ध्यान के बाद शाम को प्रसाद के रूप में गुड़ चना दिया जाता था। और हां, सबसे जरूरी तो ध्यान रखा जाता था कि खाने में खट्टा वर्जित हो। 
   आज के समय में शुक्रवार के जो व्रत रखे जा रहे हैं उनमें 11, 21, 31, 51 शुक्रवार होते हैं। अब ये जो व्रत होते हैं वे माता वैभव लक्ष्मी के हैं। अभी बहुत से लोग वैभव लक्ष्मी के व्रत करते हुए मिल जाएंगे और उनमें से एक मैं भी हूं लेकिन संतोषी माता के व्रत करते हुए शायद ही इक्का दुक्का लोग आपको मिलें। 
    माता वैभव लक्ष्मी धन, धान्य, ऐश्वर्य की मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी हैं और संतोषी माता संतोष अथवा संतुष्टि की देवी हैं और इसीलिए शायद माता संतोषी के शुक्रवार के व्रत कहीं गायब हैं जबकि मुझे लगता है आज इनकी जरूरत बहुतों को है।
  इस नवरात्र में माता रानी के इस स्वरूप का बिना सुमिरन किए दुर्गा पूजन मेरे लिए शायद अधूरा था। इसीलिए भले ही थोड़ी देर के लिए लेकिन इनके भजन सुनकर वैसा ही अनुभव हुआ जैसे किसी खोई हुई वस्तु का फिर से मिलने पर होता है। 


एक - Naari
  

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