क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

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क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

गायब होता संतोष ...

गायब होता संतोष...
  मजदूरों की झोपड़ी से गाने की आवाज आई और उस भजन को सुनते ही कुछ याद आया। बस फिर क्या था ! फिल्म तो याद आई ही साथ ही माता का यह रूप भी याद आया। 
  बहुत सालों पहले एक फिल्म आई थी 'जय संतोषी मां'। ये उस समय की शोले जैसी फिल्म की तरह ही ब्लॉक बस्टर थी। जब लोग इस फिल्म को देखने सिनेमा हाल जाते थे तब अपने जूते चप्पल भी बाहर उतारते थे और जब फिल्म में माता संतोषी का आगमन होता था तो फूल और सिक्के भी पर्दे की ओर उछालते थे। 
   और जब 'जय संतोषी मां' फिल्म दूरदर्शन पर आई तो लोग हाथ जोड़े फिल्म को देख रहे थे और जैसे ही माता के दर्शन होते सभी जय संतोषी माता के नारे लगाते। इस फिल्म में तो साधारण से किरदार निभाने वाले अभिनेताओं को भी खूब प्रसिद्धि मिली। 
  चित्र आभार: गूगल

    हालांकि माता संतोषी की पूजा अर्चना मुख्यत: उत्तर प्रदेश में ही की जाती थी लेकिन इसके बाद उनकी महिमा से कोई अछूता नहीं रहा और उसके बाद क्या उत्तर और क्या दक्षिण। माता संतोषी की पूजा पूरे देश में होने लगी। 
  घर की सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण करने के लिए 16 शुक्रवार का व्रत करते थे। स्नान ध्यान के बाद शाम को प्रसाद के रूप में गुड़ चना दिया जाता था। और हां, सबसे जरूरी तो ध्यान रखा जाता था कि खाने में खट्टा वर्जित हो। 
   आज के समय में शुक्रवार के जो व्रत रखे जा रहे हैं उनमें 11, 21, 31, 51 शुक्रवार होते हैं। अब ये जो व्रत होते हैं वे माता वैभव लक्ष्मी के हैं। अभी बहुत से लोग वैभव लक्ष्मी के व्रत करते हुए मिल जाएंगे और उनमें से एक मैं भी हूं लेकिन संतोषी माता के व्रत करते हुए शायद ही इक्का दुक्का लोग आपको मिलें। 
    माता वैभव लक्ष्मी धन, धान्य, ऐश्वर्य की मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी हैं और संतोषी माता संतोष अथवा संतुष्टि की देवी हैं और इसीलिए शायद माता संतोषी के शुक्रवार के व्रत कहीं गायब हैं जबकि मुझे लगता है आज इनकी जरूरत बहुतों को है।
  इस नवरात्र में माता रानी के इस स्वरूप का बिना सुमिरन किए दुर्गा पूजन मेरे लिए शायद अधूरा था। इसीलिए भले ही थोड़ी देर के लिए लेकिन इनके भजन सुनकर वैसा ही अनुभव हुआ जैसे किसी खोई हुई वस्तु का फिर से मिलने पर होता है। 


एक - Naari
  

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