सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।

कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।

 ये सुबह सुबह अदरक वाली चाय की चुस्कियां लेना और फ़िर अख़बार पढ़कर दुनिया जहान के खबरें पढ़ लेना। 
मेरे नसीब में कहाँ, फ़िर भी .... कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।। 
जैसे
सुबह का दूध लेना, फिर पड़ोसन से मिलना और सुबह की राम राम के साथ ही पूरी सोसाइटी का हाल जान लेना।
 कुछ पडोसन की सुनना और फिर कुछ अपनी सुना आना ...
कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।।
तुम्हरा, सिर के मेहमनो को तेल जेल से सेट करना, मखमली क्रीम से चेहरे को रगड़ना, वो खुश्बू वाले इत्र के साथ रौब से टाई और फ़िर घड़ी पहनना ।
मेरे नसीब में कहाँ, फ़िर भी .... कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।।
जैसे
उलझे हुए बालों का ही झट से जूड़ा बना लेना, दो दिन की पुरानी बिंदिया को माथे पे फिर से सजा देना। 
लाल-हरी चूड़ी और पायल को ही अपना सोलह सिंगार समझ लेना ...
कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।। 
वो दफ्तर से घर आना और सीधे रिमोट पे कब्जा कर लेना, 
टेबल पर पैर रख सोफे में बैठ जाना और फिर तीन घंटों तक लगातार मैच या बहस देखना,
तुम्हारा घर के काम से बचना, बच्चों के साथ वीडियो गैम्स खेलना और facebook- instagram से दोस्त बनाना..
मेरे नसीब में कहाँ, फ़िर भी .... कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।। 
 जैसे
रसोई की खिड़की से पडोस को ताक लेना, वो छोटी सी रसोई में जमकर पसीना बहाना। 
Fb-Ig ना सही लेकिन रोटी बनाते हुए अपने मायके बात कर लेना और सब्जी छोंकते हुए भी whatsapp के जोक्स पढ़ लेना..
कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।।
तुम्हारा हर समय यूँ मुसकुराना, ऑफिस की टेंशन को भी कभी घर ना लाना..
ये फीस, ये बिल, ये टैक्स, ये ईएमआई, 
और ना जाने किस किस चीज़ की भरपाई...
सब अकेले ही कर जाना 
और सोते सोते भी नींद में कुछ न कुछ बड़बड़ाना। 
सब काम तुम अकेले ही किये जा रहे हो, 
मैं भी तुम्हारे साथ हूँ, ये क्यों भुलाय जा रहे हो। 
कुछ तो मेरे नसीब के लिए भी छोड़ देना... 
ताकि कल जब मिलो तो, तुम भी प्यार से कह देना... 
कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।। 
कुछ तो आप से ही सीखा है जनाब…।। 

(Image source:clipart-library.com) 
एक- Naari

टिप्पणियाँ

  1. You know what I like about your writing Reena it is the fact that you convey the most sensitive and touching words in the most un dramatic way.You are a writing champ in making.
    Men in our life are so underestimated.. They may not always say the words you want them to say , may not do things the way you want them to do yet they will do everything in their might for you and the families happiness everyday in their own way.

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