सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है

सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए  शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम ...

नव वर्ष की तैयारी, मानसिक दृढ़ता के साथ

नव वर्ष में नव संकल्प: मानसिक दृढ़ता
New Year's Resolutions: Mental Strength/Resilience

  यह साल जितनी तेजी से गुजरा उतनी ही तेजी के साथ नया साल आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि एक साल तो जैसे एक दिन की तरह गुजर गया। मानो कल की ही तो बात थी और आज एक वर्ष भी बीत गया! 
 हर वर्ष की भांति इस वर्ष के अंतिम दिनों में हम यही कहते हैं कि 'साल कब गुजरा कुछ पता ही नहीं चला' लेकिन असल में अगर हम अपने को थोड़ा सा समय देकर साल के बीते दिनों पर नजर डालें तो तब हम समझ पाएंगे कि सच में इस एक वर्ष में बहुत कुछ हुआ बस हम पीछे को भुलाकर समय के साथ आगे बढ़ जाते हैं।
   इस वर्ष भी सभी के अपने अलग अलग अनुभव रहे। किसी के लिए यह वर्ष सुखद था तो किसी के लिए यह वर्ष दुखों का सैलाब लेकर आया। सत्य भी है कि इस वर्ष का आरंभ प्रयागराज के महाकुंभ से हुआ जहां की पावन डुबकी से मन तृप्त हो गया था तो वहीं प्राकृतिक आपदाओं और आतंकी घटनाओं से मन विचलित भी था। इस वर्ष की ऐसी हृदय विदारक घटनाओं से मन भय और शंकाओं से घिरकर दुखी होने लगता है लेकिन आने वाले वर्ष की मंगल कामनाओं के लिए मन को मनाना ही होता है इसीलिए सकारात्मकता के साथ बहुत सी उम्मीदों, बहुत सी आशाओं और बहुत से सपनों को संजोए एक बार फिर से नव वर्ष में प्रवेश करने के लिए सभी को तैयारी कर लेनी चाहिए।  
  ये तैयारी कोई शोर शराबा या मौज मस्ती से नहीं अपितु अपने को मानसिक रूप से दृढ़ करने का है। समय चाहे जैसा भी हो मानसिक संतुलन और शक्ति से आगे बढ़ना उचित है। मानसिक दृढ़ता का अर्थ है अपने मन को समझना और अपनी क्षमताओं को पहचानना जिससे कि हम अपने विचारों को नियंत्रित भी कर सके और कार्यों को पूर्ण भी कर सकें। यह एक ऐसी तैयारी है जो हमें हर स्थिति परिस्थिति में मजबूती से खड़े रहने का सामर्थ्य देती है, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमें टूटने नहीं देती। मानसिक दृढ़ता किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति को सहजता से निपटने का आत्मविश्वास दिलाती है। सही मायनों में आत्मविश्वास, आत्म नियंत्रण, प्रतिबद्धता और चुनौती (confidence, control, commitment and challenge) ही मानसिक दृढ़ता है। इन्हीं को समझने और इसपर चलने से हमें मानसिक मजबूती मिलती है।
  आज के दौड़-भाग वाले समय में चिंता, भय, क्रोध, तनाव, अवसाद या नकारात्मकता वाली स्थिति किसी के भी साथ हो सकती है। जो कि शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। तब ऐसी स्थिति में मानसिक दृढ़ता के साथ ही अपने को बचाया जा सकता है और स्वस्थ मन के साथ ही स्वस्थ शरीर बनाया जा सकता है।
  भविष्य में क्या होने वाला है इसकी खबर किसी को नहीं है बस सकारात्मकता के साथ तैयारी ही की जा सकती है। तो आईए नव वर्ष के स्वागत की तैयारी अपने अपने तरीके से आरंभ करते हैं जिसमें क्षणिक सुख; गीत, संगीत, नृत्य, भजन, भोजन, घूम घाम चाहे जो भी हो लेकिन साथ हो मानसिक दृढ़ता का संकल्प भी जो हमारे लिए स्थायी रूप से कल्याणकारी है।
  आने वाला नव वर्ष सभी के जीवन को खुशहाली से भर दे इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ नव वर्ष में कदम रखते हैं।
  नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!!

एक -Naari 

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