क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

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क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

नव वर्ष की तैयारी, मानसिक दृढ़ता के साथ

नव वर्ष में नव संकल्प: मानसिक दृढ़ता
New Year's Resolutions: Mental Strength/Resilience

  यह साल जितनी तेजी से गुजरा उतनी ही तेजी के साथ नया साल आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि एक साल तो जैसे एक दिन की तरह गुजर गया। मानो कल की ही तो बात थी और आज एक वर्ष भी बीत गया! 
 हर वर्ष की भांति इस वर्ष के अंतिम दिनों में हम यही कहते हैं कि 'साल कब गुजरा कुछ पता ही नहीं चला' लेकिन असल में अगर हम अपने को थोड़ा सा समय देकर साल के बीते दिनों पर नजर डालें तो तब हम समझ पाएंगे कि सच में इस एक वर्ष में बहुत कुछ हुआ बस हम पीछे को भुलाकर समय के साथ आगे बढ़ जाते हैं।
   इस वर्ष भी सभी के अपने अलग अलग अनुभव रहे। किसी के लिए यह वर्ष सुखद था तो किसी के लिए यह वर्ष दुखों का सैलाब लेकर आया। सत्य भी है कि इस वर्ष का आरंभ प्रयागराज के महाकुंभ से हुआ जहां की पावन डुबकी से मन तृप्त हो गया था तो वहीं प्राकृतिक आपदाओं और आतंकी घटनाओं से मन विचलित भी था। इस वर्ष की ऐसी हृदय विदारक घटनाओं से मन भय और शंकाओं से घिरकर दुखी होने लगता है लेकिन आने वाले वर्ष की मंगल कामनाओं के लिए मन को मनाना ही होता है इसीलिए सकारात्मकता के साथ बहुत सी उम्मीदों, बहुत सी आशाओं और बहुत से सपनों को संजोए एक बार फिर से नव वर्ष में प्रवेश करने के लिए सभी को तैयारी कर लेनी चाहिए।  
  ये तैयारी कोई शोर शराबा या मौज मस्ती से नहीं अपितु अपने को मानसिक रूप से दृढ़ करने का है। समय चाहे जैसा भी हो मानसिक संतुलन और शक्ति से आगे बढ़ना उचित है। मानसिक दृढ़ता का अर्थ है अपने मन को समझना और अपनी क्षमताओं को पहचानना जिससे कि हम अपने विचारों को नियंत्रित भी कर सके और कार्यों को पूर्ण भी कर सकें। यह एक ऐसी तैयारी है जो हमें हर स्थिति परिस्थिति में मजबूती से खड़े रहने का सामर्थ्य देती है, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमें टूटने नहीं देती। मानसिक दृढ़ता किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति को सहजता से निपटने का आत्मविश्वास दिलाती है। सही मायनों में आत्मविश्वास, आत्म नियंत्रण, प्रतिबद्धता और चुनौती (confidence, control, commitment and challenge) ही मानसिक दृढ़ता है। इन्हीं को समझने और इसपर चलने से हमें मानसिक मजबूती मिलती है।
  आज के दौड़-भाग वाले समय में चिंता, भय, क्रोध, तनाव, अवसाद या नकारात्मकता वाली स्थिति किसी के भी साथ हो सकती है। जो कि शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। तब ऐसी स्थिति में मानसिक दृढ़ता के साथ ही अपने को बचाया जा सकता है और स्वस्थ मन के साथ ही स्वस्थ शरीर बनाया जा सकता है।
  भविष्य में क्या होने वाला है इसकी खबर किसी को नहीं है बस सकारात्मकता के साथ तैयारी ही की जा सकती है। तो आईए नव वर्ष के स्वागत की तैयारी अपने अपने तरीके से आरंभ करते हैं जिसमें क्षणिक सुख; गीत, संगीत, नृत्य, भजन, भोजन, घूम घाम चाहे जो भी हो लेकिन साथ हो मानसिक दृढ़ता का संकल्प भी जो हमारे लिए स्थायी रूप से कल्याणकारी है।
  आने वाला नव वर्ष सभी के जीवन को खुशहाली से भर दे इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ नव वर्ष में कदम रखते हैं।
  नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!!

एक -Naari 

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