Shivratri Special: The Spiritual Power of Name, Vibhuti, and Rudraksha

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शिवरात्रि विशेष  शिवरात्रि के तीन रत्न: शिव नाम, विभूति और रुद्राक्ष शिव भक्तों के लिए वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण समय यानी कि महा शिवरात्रि का पर्व आ रहा है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिये सर्वोत्तम माना जाता है क्योंकि इस दिन व्रत, पूजन, चिंतन मनन, आराधना एवं भक्ति से परमपिता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शिव भक्त इस दिन अपनी अपनी तरह से किसी न किसी स्वरूप में भगवान शिव से जुड़ने का प्रयत्न करते हैं ताकि वे उस सकारत्मक ऊर्जा का आभास कर सकें जिसे वे पूजते हैं। इस सकारात्मक ऊर्जा से हम न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से मजबूत होते हैं अपितु शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से भी हमें दृढ़ होते है जिससे कि हमारा कल्याण होता है। तो आइए इस शिव रात्रि में आत्मकल्याण के लिए भगवान शिव से जुड़ते हैं। वैसे भगवान शिव से जुड़ने के लिए उनका स्मरण मात्र ही बहुत है किंतु शिवरात्रि में शिवनाम की स्तुति, विभूति और रुद्राक्ष इनका अपना अलग महत्व है। इन तीनों को पावन मन से धारण करने पर एक सकारात्मक ऊर्जा हमारे चारों ओर रहती है जिससे हमें परमपिता शिव के अपने समीप होने का आभास होता है।  ...

सावन: शिवनाम: आत्मकल्याण

 शिवनाम: कल्याण के लिए


हिन्दू सभ्यता और संस्कृति में सावन का आना मतलब कि एक नई ऊर्जा का संचार होना है। इसकी हरियाली नव जीवन का द्योतक है जो हमें शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक रूप से नया जीवन देती है। जहाँ इसे प्रेम और वृद्धि का समय माना जाता है वहीं सावन को  आत्म शुद्धि करने का समय भी माना जाता है जिसका अर्थ है हमें मानसिक, आत्मिक और अध्यात्मिक रूप से दृढ़ता मिलना। 
  
 चुंकि शिव सगुण भी हैं और निर्गुण भी, पालनकर्ता भी और संहारकर्ता भी, संसारिक भी है और विरक्त भी, शांत भी है तो रुद्र भी। हर स्थिति परिस्थिति में भगवान शिव को एक संतुलन बनाए रखते है। इसलिए भगवान शिव की आराधना से हमें जीवन में संतुलित रहने की शक्ति मिलती हैं। 



सावन मास में भगवान शिव की साधना, पूजा, अर्चना, स्तुति, पाठ, अभिषेक एवं उनके नाम मात्र के जप से ही घर में सुख, समृद्धि, शांति और शक्ति की प्राप्ति होती है इसलिए हिन्दुओं में सावन के शुभ माह में महादेव शिव को पूजा जाता है। लेकिन  सत्य यही है कि केवल सावन माह मे ही नहीं अपितु हर क्षण, हर समय, हर काल में शिव नाम सर्वदा हितकारी है।


 
गृहस्थ जीवन के लिए:
  चुंकि शिव ऐसे भगवान है जो गृहस्थ भी है और योगी भी। भगवान शिव आदियोगी हैं वे समाधि में होते हैं, ध्यान में रहते हैं लेकिन अपनी प्रिया पार्वती से भी अथाह प्रेम करते है और उन्हें अपने
वामांग में धारण करते हैं। 
शिव अपने पुत्रों को एक पिता की भांति ही प्यार के साथ अनुशासन में रखते हैं और पिता की सारी जिम्मेदारी लेते हैं। हिन्दु धर्म में केवल भगवान शिव ही है जिनका हम सपरिवार पूजन करते हैं जिसमें हम शिव को आदर्श गृहस्थी की भाँती पूजते हैँ और अपने परिवार की मंगल कामना करते हैं। 
  परमपिता शिव अपने परिवार के साथ ब्रह्मांडीय सामंजस्य स्थापित करते हैं जो सर्वथा पूजनीय है। शिव एक आदर्श गृहस्थी की भांति इस संसार को चलाते हैं इसलिए अपने आराध्य देव के अनुसरण करने के लिए एक उत्तम गृहस्थी के लिए भगवान शिव की भक्ति कल्याणकारी होती है। 



अगाध प्रेम के लिए: 
शिव चाहे सती के साथ हैं चाहे गौरी के साथ। उनका प्रेम अगाध रहा है। केवल प्रेम ही नहीं शिव और पार्वती के सम्बन्ध में प्रेम के साथ विश्वास, भक्ति, श्रद्धा, समर्पण, जिम्मेदारी है। शिव और शिवा एक दूसरे के पूरक हैं। उनका प्रेम एक लहर और एक दिशा में प्रवाहित होता है। शिव महापुराण में भी शिव ने देवी सती के लिए ऐसा ही वर्णन किया है कि जब शिव योगी हों तो शिवा उनके साथ योगिनी हैं और जब काम आसक्त हैं तो शिवा उनकी कामिनी। 
परम पिता शिव के साथ माता का सम्बन्ध अटूट है इसलिए सावन में माता पार्वती की पूजा का विधान भी है। उत्तम पुरुष के  वरण के लिए, अखंड सौभाग्य के लिए, इच्छित वर के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा फलदायी है। 



मन की शांति और शक्ति के लिए: 
  शिव का एक रूप रुद्र भी है जिसका अर्थ ही भयंकर, भयानक है लेकिन महादेव के समान शांत भी कोई नहीं है। वे शांत भाव से अपने ध्यान और समाधि में विलीन रहते है और अपनी शक्तियों को दृढ़ रखते है। वे परम योगी हैं जो अपनी ऊर्जा को नियंत्रित रखते हैं और अपने तेज का प्रयोग जगत के कल्याण के लिए करते हैं। 
   शिव की स्तुति यही सिखाती है कि शांत चित्त से दुख, चिंता, तनाव, गुस्सा जैसी सभी भावनाओं पर नियंत्रण रखा जाता है और अपनी ऊर्जा को केन्द्रित किया जा सकता है जिससे कि इसका प्रयोग सही दिशा में हो सके। असल मे यह समय  शक्तियों को पहचानने का समय होता है। 
  जैसे शिव के शांत रूप से मिली शक्तियों से रुद्र है जिनका अर्थ समस्याओं का जड़ से निवारण है वैसे ही चित्त की शांति और स्थिरता से मिली शक्ति से जीवन की समस्याओं का अंत हो जाता है। 
  सावन में शिव के नाम और ध्यान मात्र से चंचल मन को स्थिरता मिलती है, परम  शान्ति का अनुभव होता है और आतंरिक शक्ति का अनुभव होता है। 

   तो आइये सावन मे कल्याणकारी
शिव का श्रवण, मनन और चिंतन से आत्म साक्षात्कार करें और परमपिता का आशीर्वाद प्राप्त करें।



ॐ नम शिवाय ।।
हर हर महादेव।।

एक- Naari 
 


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