सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है

सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए  शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम ...

जीवन: चिंता नहीं चुनौती

जीवन: चिंता नहीं चुनौती
      हमें लगता है कि दूसरों की जिंदगी बड़ी अच्छी है, वो कितनी आसानी से और कितने सुख से अपना जीवन जी रहे हैं। हमें दिखता है कि वे सभी अपने जीवन में बहुत खुशी से हैं। वे सभी हँसते हैं, मुस्कुराते हैं, घूमने जाते हैं और तरह तरह का खाना खाते हैं लेकिन सच मानें बाहर से दिखने वाली ये सरल सी जिंदगी कठिनाई भरी भी होती है। उन लोगों की ये जिंदगी बाहर से भले ही सुलझी दिखाई दे लेकिन अंदर से उलझनों का एक कोना हमेशा लोगों के अंदर सुरक्षित रहता है। बस ये उनका जीवन जीने का अपना ढंग है और अपनी परेशानी या लड़ाई लड़ने का अपना तरीका। ये उनका अपना हुनर है कि वो इस जीवन को चिंता या तनाव के साथ गंभीरता से लें या फिर सहज तरीके से चिंता छोड़कर इन चुनौतियों को पार करें। 
   जिंदगी किस की आसान है, शायद किसी की भी नहीं। ऐसा कौन है जो बिना किसी चिंता, तनाव, डर, असुरक्षा के हो! समाज का हर तबका चाहे छोटा हो या बड़ा किसी न किसी तरीके से या किसी भी रूप में अपनी उलझनों में फँसा हुआ है। कोई अधिक तो कोई कम लेकिन छोटी बड़ी परेशानियाँ तो है ही। कहीं न कहीं तो दिमाग में कुछ चलता ही रहता है जो जीवन की अनिश्चितताओं को दोहराता रहता है। यहाँ सभी अपने अपने हिस्से की लडाई लड़ रहे हैं और अपने अपने तरीके से चुनोतियों का सामना कर रहे हैं लेकिन चाहे कुछ भी हो लोग अपने जीवन की गाड़ी अपने ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। फर्क बस इतना है कि कोई इस गाड़ी को दौड़ा रहा है और कोई पूरे जोर से आगे बढ़ा रहा है और कोई शायद उस गाड़ी के बोझ तले रेंग रहा है। फिर भी लोग अपने जीवन की तरह तरह की चुनौतियों को पार करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। और यह सही भी है कि लोग अपनी स्थिति परिस्थिति, भाग्य को एक तरफ रख कर स्वयं पर विश्वास करते हैं। भले ही कितनी कठिनाईयों हो लेकिन जीवन यापन के लिए अपना संघर्ष करना नहीं भूलते हैं। वहीं कुछ लोगों का चिंताओं, शंकाओं और दुविधाओं के बीच अपने को लाचार असहाय अकेला समझना और जीवन से हार मान लेना उनकी कमजोरी, कायरता और मूर्खता को दर्शाता है।  यह अलग बात है कि उनकी मन:स्थिति एक आम आदमी से अलग हो वो किसी अवसाद के शिकार हों लेकिन यह स्थिति भी तो एक मानसिक विकार है। और इस विकार तक पहुँचने से पहले ही जीवन के हर रूप को सहजता से स्वीकार करें और हर एक परेशानी या दुविधा को चिंता नहीं अपितु चुनौती की भाँति स्वीकार करें। 
   जीवन में चुनौतियों का सामना करने का अर्थ है अनुभव की एक सीढ़ी आगे बढ़ जाना। जीवन के ये अनुभव ही आगे आने वाली चुनौतियों में हमारी सहायता करते हैं इसलिए किसी विपरीत स्थिति परिस्थिति में भी जीवन का साथ न छोड़े। हर चुनौती या संघर्ष का डटकर सामना करें। 

एक -Naari

टिप्पणियाँ

  1. जीवन का दूसरा नाम ही चुनौती है।

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। साधुवाद

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  3. Very true..struggle takes us a step closer to our goal. Very good piece of writing. Keep it up..

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