सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है

सावन विशेष: भगवान शिव के प्रिय कौन हैं? जानिए  शिवजी को क्या सबसे अधिक प्रिय है सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम ...

Happy Teachers Day

  Happy Teachers Day
   कहते हैं जो सिखाए वही गुरु है और मनुष्य के अंदर सीखने का गुण हो तो उसे जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य अपने पास बहुत से गुरुजन पाता है जहाँ वो दूसरों से कुछ न कुछ सीखता है। घर से, परिवार से, विद्यालय से, साथ से, समाज से, इस प्रकृति से हम हमेशा कभी न कभी किसी न किसी रूप में कुछ तो सीखते ही है इसलिए सम्मान तो सभी के लिए होना चाहिए लेकिन जो शिक्षा गुरुकुल में अक्षर ज्ञान और अनुशासन के साथ हमें अपने शिक्षकों द्वारा मिलती है वो बहुत अनमोल होती है इसीलिए उन शिक्षकों के लिए एक दिन सम्मान के साथ धन्यवाद का भी। 
    5 सितम्बर को शिक्षक दिवस है तो सभी अपने गुरुजन को प्रणाम करते हैं। अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आदर व्यक्त करते हैं। स्कूल कॉलेज में तो शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाता है और कई भव्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। कुल मिलाकर आज का दिन समर्पित होता है शिक्षकों के लिए जिन्होंने अपने ज्ञान से हमें एक कोमल पौध से एक वृक्ष बनाया। 
  भारत में गुरु का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। भारत की पहचान ही यहाँ की संस्कृति और सभ्यता है और हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा गुरु शिष्य परंपरा का भी है इसीलिए तो हिंदू धर्म में अपने गुरु के प्रति श्रद्धा अभिव्यक्ति के लिए गुरु पूर्णिमा का दिन होता है जहाँ लोग अपने अध्यात्मिक गुरु का वंदन करते हैं लेकिन साथ ही 5 सितंबर का दिन भी अपने गुरुजन और शिक्षकों के प्रति समर्पित होता है। 
   शिक्षक हमें केवल विद्यालय या घर में पढ़ाते ही नही है अपितु शिक्षा के माध्यम से और अपने अनुभवों से अच्छे बुरे का ज्ञान भी कराते हैं। ये हमारे समाज के शिल्पकार होते हैं जो भावी पीढी को साँचे में ढालते हैं इसलिए जीवन और समाज में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका को समझते हुए भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 

टीचर्स डे: शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है
  भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन केवल राष्ट्रपति ही नहीं थे अपितु एक महान शिक्षाविद् भी थे। उन्होंने पूरे विश्व को एक विद्यालय माना था जहाँ से कुछ न कुछ हमेशा सीखा जा सकता है। वे किताबी ज्ञान से अधिक नैतिक और बौद्धिक विकास पर ध्यान देते थे। 
  एक बार उनके शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की सोची। तब उस समय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने अपना जन्मदिन मनाने के बजाए यह दिन सभी शिक्षकों को समर्पित करने का सुझाव दिया और फिर तभी से 1962 को इस दिन यानी 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में भारत में मनाया जाने लगा। 


   अब भले ही हमारे प्रिय शिक्षक हमारे संपर्क में हो या न हो लेकिन इस दिन उनका स्मरण अवश्य करें, उनकी डाँट से लेकर उनके समझाने तक की खट्टी मीठी यादों का स्मरण करें, और साथ ही ये भी ध्यान रखें कि आज के समय में भले ही शिक्षा के स्वरूप बदल गए हों, शिक्षा प्रणाली में अंतर आ गए हो लेकिन शिक्षक के कार्य में कोई परिवर्तन नहीं है,,वो पहले भी समाज को शिक्षित बनाता था और आज भी, इसलिए शिक्षक दिवस पर उनका सम्मान करना चाहिए। 
शिक्षक दिवस की बधाई।। 
Happy Teachers Day।। 

एक -Naari

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मेरे ब्रदर की दुल्हन (गढ़वाली विवाह के रीति रिवाज)

उत्तराखंडी अनाज.....झंगोरा (Jhangora: Indian Barnyard Millet)

ननिहाल का आनंद