क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

चित्र
क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

International Women's Day

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

International Women's Day 


सुन्दर नहीं सशक्त नारी



 "चूड़ी, बिंदी, लाली, हार-श्रृंगार यही तो रूप है एक नारी का। इस श्रृंगार के साथ ही जिसकी सूरत चमकती हो और जो  गोरी उजली भी हो वही तो एक सुन्दर नारी है।"  कुछ ऐसा ही एक नारी के विषय में सोचा और समझा जाता है। समाज ने हमेशा से उसके रूप और रंग से उसे जाना है और उसी के अनुसार ही उसकी सुंदरता के मानक भी तय कर दिये हैं। जबकि आप कैसे दिखाई देते हैं  से आवश्यक है कि आप कैसे है!!

ये अवश्य है कि श्रृंगार तो नारी के लिए ही बने हैं जो उसे सुन्दर दिखाते है लेकिन असल में नारी की सुंदरता उसके बाहरी श्रृंगार से कहीं अधिक उसके मन से होती है और हर एक नारी मन से सुन्दर होती है। 
वही मन जो बचपन में निर्मल और चंचल होता है, यौवन में भावुक और उसके बाद सुकोमल भावनाओं का सागर बन जाता है। 

इसी नारी में सौम्यता के गुणों के साथ साथ शक्ति का समावेश हो जाए तो तब वह केवल सुन्दर नहीं, एक सशक्त नारी भी है और इस नारी की शक्ति है ज्ञान। इसलिए श्रृंगार नहीं अपितु ज्ञान की शक्ति एक महिला को विशेष बनाती है।

  ज्ञान एक ऐसा शस्त्र है जो प्रत्येक महिला को सशक्त बनाता है इसलिए किसी भी क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने के लिए उन्हें उस क्षेत्र का ज्ञान होना आवश्यक है फिर चाहे वो आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र ही क्यों न हो। इसलिए महिलाओं की छवि सुन्दर नारी की अपेक्षा सशक्त करने के लिए ज्ञान की शक्ति पर अधिक बल दिया जाना चाहिए। इसी कड़ी में महिलाओं की शक्ति, साहस, क्षमता, प्रतिभा, आत्मसम्मान और उनके विचारों को पहचानने के लिए महिला दिवस एक बहुत अच्छा अवसर है। 

 अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) थीम

इसी नारी को समर्पित है नारी दिवस। नारी दिवस / महिला दिवस 8 मार्च को अंतर राष्ट्रीय रूप में मनाया जाता है इसलिए 8 मार्च का दिन 'अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस' के नाम से जाना जाता है।  

प्रत्येक महिला के उत्थान, सम्मान, समानता, अधिकार, सशक्तिकरण और उन्हें जागरूक करने के लिए महिला दिवस मनाया जाता है ताकि उनका  चंहुमुखी विकास निश्चित हो। 

  1996 से हर वर्ष एक नये विषय के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस  मनाया जा रहा है। इस वर्ष (8 मार्च 2025) की थीम है, 'Accelerate Action' (तेजी से कार्यवाही) जो कि महिलाओं की स्थिति को बेहतर करने के लिए लैंगिक समानता की दिशा में होने वाले कार्यों में तेजी लाने पर बल देता है। 

 वास्तव में यह दिन केवल एक दिन यानी 8 मार्च को ही नहीं अपितु इस विषय पर हमेशा विचार करने पर बल देता है।
 

महिला दिवस का इतिहास/ महिला दिवस क्यों मनाया जाता है??


History of International Women's  Day 


आज महिला दिवस एक उत्सव की भांति मनाया जाता है लेकिन इसका आरम्भ महिलाओं द्वारा किये गये आंदोलनों से था। अमेरिका और यूरोप जिन्हें विकसित देश कहा जाता है वहां भी महिलाओं की दशा बहुत अच्छी नहीं थी। महिलाएं पुरुषों से बहुत पिछड़ी हुई थी। जो देश आर्थिक रूप से मजबूत भी थे वहां भी महिलाओं को वेतन की असमानता के साथ साथ वोट देने का अधिकार तक भी नहीं दिया गया था। 19वीं शताब्दी के आरंभ में नौकरीपेशा महिलाओं द्वारा हड़ताल और आंदोलन किये गए, जिसमें वो अपने अधिकारों के लिए लड़ी। 
इन अधिकारो के लिये अमेरिका में सन् 1908 में वहाँ की लगभग 15000 महिलाएं सड़कों पर आ गई थी। ये महिला दिवस के आरम्भ होने का कारण बना। इसका श्रेय 1910 में 'क्लारा जेटकिन' को जाता है जिन्होंने कोपेनहेगन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया।

अमेरिका में तो 28 फरवरी 1909 में ही पहला महिला दिवस मनाया गया था जब वहाँ की एक कपड़ो की फैक्ट्री की सभी महिला कर्मचारी हड़ताल पर चली गई थी।

फिर 1911 में यूरोप के कुछ देश (ऑस्ट्रि‍या, डेनमार्क, जर्मनी, स्विटजरलैंड) की महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन और रैलियां की। उसके बाद इन देशों ने भी अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस मनाना आरंभ किया।

रूस में महिलाओं ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शांति की स्थापना के लिए फरवरी माह के अंतिम रविवार को पहला महिला दिवस मनाया। 1917 में एक बार फिर रूसी महिलाओं ने सम्राट निकोलस की सत्ता पलटने के लिए 'ब्रेड एंड पीस' नाम से हड़ताल आरंभ कर दी और परिणामस्वरूप अंतरिम सरकार ने मतदान का अधिकार भी दिया। जिस दिन हड़ताल आरंभ हुई, उस दिन रूसी जूलियन कैलेंडर में दिन था 23 फरवरी का लेकिन ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार यह दिन 8 मार्च को था। उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा। लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में आधिकारिक रूप से प्रति वर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की घोषणा की।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाओं के साथ... Happy Women's  Day


एक -Naari 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मेरे ब्रदर की दुल्हन (गढ़वाली विवाह के रीति रिवाज)

उत्तराखंडी अनाज.....झंगोरा (Jhangora: Indian Barnyard Millet)

अहिंसा परमो धर्म: