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क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

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क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

महिलाएं बच्चों को प्रकृति के साथ कैसे जोड़ें

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महिलाएं बच्चों को प्रकृति के साथ कैसे जोड़ें How to connect children with nature...      ये तो आप सभी मानते ही हैं कि बच्चा सबसे पहले अपने घर परिवार से सीखता है और उस परिवार में भी बच्चों के प्रति एक माँ का दायित्व अन्य की तुलना में अधिक माना जाता है। इसीलिए एक माँ ही अपने बच्चे की प्रथम मित्र और शिक्षिका दोनों होती है।      अब जिस प्रकार से माँ और बच्चे का संबंध बहुत ही महत्वपूर्ण है इसी तरह से हर मनुष्य का एक और महत्वपूर्ण संबंध है जो होता है प्रकृति माँ से। प्रकृति माँ के बिना भी मनुष्य की कल्पना करना असंभव है। ये प्रकृति माँ ही हैं जो हमें बचपन से इस सुंदर दुनिया का आभास कराती है।    अपनी आने वाली पीढी़ को भी एक सुंदर और स्वस्थ वातावरण देने के लिए अपने बच्चों को बचपन से ही प्रकृति माँ से जुड़ने की प्रेरणा हमें समय समय पर देनी चाहिए। इसके लिए बच्चों की आयु वर्ग के अनुसार आप नए नए विकल्प खोज सकती हैं जो बच्चों को प्रकृति माँ से जुड़ने की प्रेरणा दे।   जिसका आरंभ हमें सबसे पहले प्रकृति शब्द के स्थान पर प्रकृ...

स्वदेशी खादी

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स्वदेशी खादी     नये नये कपड़े पहनने की चाह हमेशा से ही हर दिल में रहती है तभी तो चाहे कितने भी कपड़े हो लेकिन हमारे लिए हमेशा कम ही होते हैं। खासकर कि महिलाएं, जिनके पास घर में कपड़ों के ढ़ेरों विकल्प होते हैं लेकिन समय पर एक भी विकल्प नहीं भाता!! आज बाजार में रंग, फैब्रिक, डिजाइन सब तरह के विकल्प उपलब्ध हैं इसीलिए तो वस्त्र उद्योग आज चरम पर है।     2800 ईसा पूर्व से ही वस्त्रों के विकास की जो झलक सिंधू घाटी सभ्यता से मिली उसने यह सिद्ध कर दिया कि वस्त्र उद्योग भारत के प्राचीन उद्योगों में से एक है। धीरे धीरे समय बीतता गया और तकनीकी ज्ञान के साथ वस्त्र उद्योग भी आगे बढ़ता गया।    भले ही तकनीक और अपने प्रयोगों से तरह तरह के कपड़े बन रहे हैं लेकिन आज भी हाथ से बने हुए कपड़ों का अपना एक विशिष्ट स्थान है। जैसे कि खादी। खादी एक ऐसा स्वदेशी वस्त्र है जो हाथ से कते हुए सूत से बनाया जाता है और जो हमें भारतीयता से जोड़ता है। जिस समय भारत अपनी आजादी के लिए लड़ रहा था। उस समय खादी एक आंदोलन की तरह उभरा जो पूरे भारत में एकता की मिसाल की तरह फैल गया। म...