क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

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क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

Happy Independence Day

15 अगस्त: आजादी का अमृत महोत्सव 
जरा याद करो कुर्बानी.... 


आज याद आया दिन कुर्बानी का
गांधी पटेल बलिदानी का
आज़ाद भगत वीर सैनानी का
झांसी वाली मर्दानी का 

आज याद आया दिन कुर्बानी का... 

वो वक़्त था जंग ए आज़ादी का
खुदी बोस की जवानी का
नेता जी हिंदुस्तानी का
बिस्मिल, अशफ़ाक़ की कहानी का

आज याद आया दिन कुर्बानी का... 

एक प्रतिज्ञा तुम भी कर लो
सर न झुके कभी हिंदुस्तान का
कोई गरीब भूखा न सोए
न बहे लहू किसी इंसान का
बिगुल बजा दो दुनिया में अब
वक्त नहीं किसी मेहरबानी का

आज याद आया दिन कुर्बानी का... 

नई खोज से बनो केसरी
प्रेम का ओढ़ो सफेदा
धरती का सीना सींचो
आज देश बनाओ हरियाली का
पढ़ो लिखो, चाहे खेलो कूदो
पहले तिलक करो इस माटी का 
फिर करो नमन अपनी माँ भवानी का

आज याद आया दिन कुर्बानी का... 

गांधी पटेल बलिदानी का
आज़ाद भगत वीर सैनानी का
झांसी वाली मर्दानी का 
आज याद आया दिन कुर्बानी का.... 
एक -Naari

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