पेट तो अपना है.... शाही दावतों का दौर शुरू हो चुका है। जन्मदिन की पार्टी तो अमूमन हर महीने ही हो रही हैं लेकिन आजकल के मौसम में कहीं सगाई तो किसी की शादी की दावत चल रही है। साथ ही किसी की शादी की सालगिरह का भोज हो रहा है और अब तो क्रिसमस और नए साल की दावतों का आयोजन भी आरंभ हो चुका है।
रंग बिरंगे जूस से लेकर सूप और कॉफी के अनगिनत ग्लास हैं तो इंडियन और कॉन्टिनेंटल वाले सलाद के थाल भी सजे हैं। साथ ही साथ गरमा गर्म इंडियन और चाइनीज स्नैक्स की बहार तो है ही। वहीं खाने में तरह तरह के व्यंजन से तो पूरा माहौल ही खुशनुमा से अधिक खानेनुमा हो जाता है और तो और सर्दियों की इन दावतों में मीठे के काउंटर भी तो तरह तरह की मिठाइयों, आइसक्रीम और बेकरी उत्पाद से खचाखच भरे रहते हैं। अब ऐसी दावत में बिना खाए कोई कैसे रह सकता है, वो भी इस मौसम में!!
क्या करें, ये मौसम ही कुछ ऐसा है कि भूख भी अधिक लगती है, खाना भी अधिक खाया जाता है और सारे समारोह की दावतें भी इन्हीं मौसम में हो रही हैं इसलिए खुद को इन दावतों से दूर रख पाना मुश्किल है लेकिन कुछ नियंत्रण तो जरूरी है। बिना नियंत्रण के पेट की गड़बड़ी भी निश्चित है इसलिए थोड़ा रहम भी क्योंकि भले ही दावत अन्य की ओर से हो लेकिन पेट तो अपना ही है... इसलिए अपनी हैप्पी टमी के लिए दावत का मजा लें लेकिन थोड़ी समझदारी के साथ।
..दावत में जाते ही कॉफी न लें। कॉफी के स्थान पर अगर सूप का विकल्प हो तो उसे चुने। भले ही कॉफी आपको ऊर्जा से भर दे लेकिन खाली पेट कॉफी पीने से पेट में एसिड भी बनता है जिससे आप अन्य पकवानों का लुत्फ नहीं ले पाएंगे जबकि सर्दियों में गर्म वेजिटेबल सूप एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो पाचन क्रिया को बढ़ा देता है।
..कॉन्टिनेंटल सलाद होते तो बड़े ही स्वादिष्ट होते हैं क्योंकि ये क्रीम से बने होते हैं तो थोड़ा खाया जा सकता है लेकिन हरा सलाद पेट के लिए अधिक फायदेमंद है। गाजर, चुकंदर, खीरा, प्याज, टमाटर, पालक, नींबू से बना सलाद खाना खाने से आधे घंटा पहले लें। इस सलाद को खाने पर हमें फाइबर प्रोटीन और विटामिंस भरपूर मिलेंगे। इसके अलावा फल और अंकुरित सलाद भी बहुत फायदेमंद होता है। सलाद को खाना खाने के साथ खाने पर जठराग्नि धीमे काम करती है क्योंकि खाना गर्म होता है जबकि सलाद ठंडा और जब दोनों साथ में खाएं जाए तो पाचन क्रिया मंद होती है इसलिए सलाद कब खाया जाए इसपर भी ध्यान दें।
.. मसालेदार पानी के गोलगप्पे हों चाहे आलू की करारी टिकिया या फिर कुरकुरे डोसे, चीला, नूडल्स या फिर वेज पकौड़े। सभी का मजा लें लेकिन ध्यान दें कि किसी भी एक चीज से ही पेट न भर दें क्योंकि अन्य व्यंजन भी आपको बुलाएंगे और आप ओवर ईटिंग का शिकार हो जाएंगे। ऐसे में पाचन क्रिया मेंअधिक दबाव पड़ेगा और फिर ये दावत अगले दो दिनों तक पेट के लिए भारी पड़ेगी।
.. चटोरे तो हम होते ही हैं और दावत में जब भिन्न प्रकार की चटनियां हो तो उनमें से चुनाव धनियां,पुदीना, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक से बनी हरी चटनी का करें क्योंकि ये मल्टी विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट की दुकान होती हैं जो एंटी इंफ्लामेट्री भी है। हरी चटनी सभी तरह के व्यंजन में कमाल का जायका देती हैं और साथ ही पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है।
.. मुख्य व्यंजन अधिकतर एक ही करी से बने होते हैं बस कुछ मसालों का फेर कर दिया जाता है इसलिए हर एक मसालेदार पकवान का लुत्फ लेने के स्थान पर अपनी थाली में सीमित दाल सब्जी का ही चम्मच डालें। मसालेदार चीजों को पचाने में अधिक एसिड बनता है जिससे सीने में जलन होना आरंभ हो जाता है इसलिए समझदारी से खाने का चुनाव करें।
.. बिना मिठाई के कोई दावत पूरी हुई है भला! अब तो शादी समारोह में तरह तरह के मीठे रसीले पकवानों की झड़ी रहती है और अपनी लपलपाई जीभ तो कभी कभार सीधे ही सबसे पहले मीठे की ओर भागती है।
पहले से ही सुनते आएं हैं कि खाने के बाद मीठा खाना चाहिए और आज भी हम ऐसा ही करते हैं। पहले मीठे के नाम पर केवल गुड या शक्कर ही होती थीं या उनसे बनी खीर, हलवा, बर्फी, तिल, मूंगफली या मेवा के लड्डू। इसी प्रकार की सीमित मिठाई थी जो साधारण गुड, घी, आटा, बेसन या दाल से बनाई जाती थी। ये पौष्टिक मिठाईयां थी जो खनिज और आयरन के स्त्रोत थे लेकिन आज मीठे के नाम पर केवल रसायन और कैलौरी का भंडार ही परोसा जाता है। इसलिए थोड़ा सोचकर ही मीठा खाएं।
मसालेदार खाने से पाचन क्रिया तेजी से बढ़ती है जिससे एसिड की मात्रा भी बढ़ जाती है जबकि मीठा खाने से कार्बोहाइड्रेट मिलता है जो इस क्रिया को थोड़ा धीमे कर देता है जिससे कि पाचन क्रिया ठीक रहती है इसलिए खाने के बाद ही मीठा लें वो भी सीमित मात्रा में और आजकल तो यही माने कि मीठा खाने से सेरोटोनिन नाम के हॉर्मोन का स्त्राव होता है जिससे हमें खुशी मिलती है और अधिक ठूंसने पर वजन।
सर्दियों में भूख भी अधिक लगती है कारण है कि शरीर खुद को गर्म रखने के लिए ऊर्जा खर्च करता है इसलिए खाना भी जल्दी पच जाता है लेकिन ध्यान दें कि एक साथ अधिक खाना न खाएं । कम अंतराल में थोड़ा थोड़ा खाते रहें। इन दावतों में भी एक साथ खाना खाने से बचे। खाना लजीज तो होता है लेकिन भारी भी इसलिए ये मान कर चलें कि किसी भी शाही दावत में आप परोसे गए सभी व्यंजन नहीं खा सकते हैं लेकिन हां, काफी व्यंजनों का लुत्फ समझदारी से ले सकते हैं इसलिए थोड़ा थोड़ा ही लें।
जितने अधिक पकवान पेट में डाले जाएंगे उतने तरीके के पाचक रस हमारे पेट से भी निकलेंगे और इन्हीं सब क्रियाओं में पेट गैस, एसिडिटी, भारीपन और कब्ज की शिकायत लेकर बैठ जाएगा इसलिए दावतों के इन निमंत्रणों को केवल खाने से न जोड़कर आपसी मेल जोल और हंसी खुशी का निमंत्रण भी समझे। भले ही इन दावतों में परोसे गए शाही व्यंजन आपके स्नेही जन के ओर से थे जिनसे हमारा मन कभी न भरे लेकिन सोचे, पेट तो अपना है...
एक - Naari
Sundar Bichar !!
जवाब देंहटाएंInteresting post,,, some time I also do the same... overeating
जवाब देंहटाएंWah wah...
जवाब देंहटाएंWah
जवाब देंहटाएंUseful Information, thanks a lot,
जवाब देंहटाएंBahot sahi baatyein batai aapne Reena ji. Interesting read..
जवाब देंहटाएंSahi aur satye
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