सावन विशेष: शिव के प्रिय..

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सावन विशेष: भगवान  शिव के प्रिय कौन हैं?  जानिए   सावन आये और शिव का नाम न हो!! ऐसा कैसा हो सकता है। जैसे सावन की बारिश से धरती का वातावरण साफ और शुद्ध हो जाता है वैसे ही सावन में शिव के नाम से ही मन भी निर्मल होने लगता है। सावन माह की बारिश में हर वनस्पति अपने वृद्धिकाल में होती है इसलिए धरती का कोना कोना हरियाली से भरा रहता है और जब प्रकृति अपने इस सुंदर रूप में होगी तो मन का चंचल होना स्वाभाविक है। ऐसे में जहां मन अस्थिर होता है वहीं सावन में मन को स्थिर और शांत रखने के लिए शिव का ध्यान किया जाता है। ऐसे में प्रकृति स्वयं हमारे  मानसिक नियंत्रण एवं आध्यात्मिक विकास के लिए हमें भगवान शिव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है और फिर हम सभी भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना में लग जाते हैं चूंकि प्रकृति स्वयं शिवा अर्थात पार्वती है जो शिव का ही भाग है इसलिए प्रकृति के साथ पूरा वातावरण ही शिवमय हो जाता है और हमारा मन भी शिव में लीन होने लगता है।   हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस विशेष काल में शिव नाम से ही मा...

गणतंत्र दिवस...आओ थोड़ा शीश झुकाएं

      जिस उद्योग की गति रफ्तार से भाग रही थी कोरोना काल के कारण उसी की चाल थोड़ी धीमी हो गई है और बहुत से साथी इससे प्रभावित भी हुए हैं इसीलिए गणतंत्र दिवस पर ये एक छोटी सी कविता मेरे उन साथियों के लिए है जो होटल और पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं। 
आओ थोड़ा शीश झुकाएं, 
          कुछ पल वंदे मातरम् गाएं। 
छोड़ पुराने काले दिनों को,
          नई आशा के दीप जलाएं। 
रुकी चाल से फिर धीमी हुई, 
          अब चलो आगे बढ़ जाएं। 
कुछ सोचें नवीन तो, 
           कुछ पुरानी सीढ़ी चढ़ जाएं। 
महापुरषों को याद करें, 
            अपनी हिम्मत को पहचानें।
साथी सभी अब मिलकर, 
            आओ थोड़ा शीश झुकाएं। 
कुछ पल वंदे मातरम् गाएं । 
             कुछ पल वंदे मातरम् गाएं।। 

(Dedicated to Hotel &Tourism Industry) 

एक-Naari


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