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दिसंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

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क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

कुछ कहता है 2022...Goodbye 2022

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कुछ कहता है 2022... Self Assessment (आत्म आंकलन)     बस अब कुछ दिन शेष है और नव वर्ष हमारे सामने अपने स्वागत के लिए खड़ा है और हम भी नव वर्ष के आगमन की तैयारी में हैं। इन बचे हुए बाकी के दिनों में हम बस यही कहते और सुनते चले जाते हैं कि "साल कब बीत गया, पता ही नहीं चला!" और पता भी तो कैसे चलेगा क्योंकि हम सभी अपने अपने जीवन में सेकंड की सुई की तरह से चलायमान है। जैसे समय किसी के लिए नहीं रुकता वैसे ही जीवन का पहिया भी लगातार चलता रहता है। तभी तो समय गुजरता रहता है और हम अपने उम्र के सफर में आगे बढ़ते रहते हैं।    नए साल में कदम रखने की खुशी तो सभी को होती है इसीलिए तो लोग अपनी खुशीयां मनाते घर, बाजार, होटल, हिल स्टेशन या पवित्र धामों में दिखाई दे जाते हैं। जहाँ नव वर्ष के आगमन का शोर है वहीं बीता हुआ वर्ष भी कुछ कहता है जिसे सुनना भी जरूरी है।    'गुजरा साल कब बीता पता ही नहीं चला' की रट छोड़कर 'गुजरा साल कैसे बीता'...इस पर एक मनन अवश्य होना चाहिए। क्योंकि आने वाले कल के सुधार के लिए बीते हुए कल की एक झलक जरूरी है।     बीता हुआ ...