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मार्च, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

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क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

थोड़ा कुमाऊँ घूम आते हैं...

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 थोड़ा कुमाऊँ घूम आते हैं...    जब सफर में दो बच्चे साथ हों तो रास्ता कितना भी लंबा हो उसका पता ही नहीं चलता वो भी भाई बहन क्योंकि उनके झगड़े, खींचतान, वाद विवाद सुलझाते सुलझाते आपकी मंजिल कब आ जाती है उसका पता ही नहीं चलता। ऐसा ही कुछ हाल हमारे साथ भी था क्योंकि मेरे दोनों बच्चे जिया और जय मेरे साथ एक छोटे से सफर में थे।    योजना तो पता नहीं कहाँ से आरम्भ हुई जो गोवा, दिल्ली, मथुरा, वृंदावन से होते होते अपने उत्तराखंड में ही समाप्त हुई क्योंकि इतने कम समय में सोचा कि थोड़ा कुमाऊँ घूम आते हैं। इसलिए मैं, विकास, माँ (सास जी) और दोनों बच्चे सभी एक साथ उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल के प्रसिद्ध स्थलों में से कुछेक का भ्रमण करने जा रहे थे।   वैसे सोचा था कि मार्च के अंतिम दिनों में घूमने जायेंगे, जब दोनों बच्चे वार्षिक परीक्षाओं के बाद अपनी नई कक्षाओं में जाने की तैयारी कर रहे हो लेकिन जब एक ही घर के दो बच्चे अलग अलग विद्यालय के छात्र हो तो कहीं न कहीं छुट्टियों के कैलेंडर का तालमेल गड़बड़ा ही जाता है। जैसे कि जिया की वार्षिक परिक्षाएँ तो समाप्त हो च...