Posts

Showing posts from March, 2022

नव वर्ष की तैयारी, मानसिक दृढ़ता के साथ

Image
नव वर्ष में नव संकल्प: मानसिक दृढ़ता New Year's Resolutions: Mental Strength/Resilience   यह साल जितनी तेजी से गुजरा उतनी ही तेजी के साथ नया साल आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि एक साल तो जैसे एक दिन की तरह गुजर गया। मानो कल की ही तो बात थी और आज एक वर्ष भी बीत गया!   हर वर्ष की भांति इस वर्ष के अंतिम दिनों में हम यही कहते हैं कि 'साल कब गुजरा कुछ पता ही नहीं चला' लेकिन असल में अगर हम अपने को थोड़ा सा समय देकर साल के बीते दिनों पर नजर डालें तो तब हम समझ पाएंगे कि सच में इस एक वर्ष में बहुत कुछ हुआ बस हम पीछे को भुलाकर समय के साथ आगे बढ़ जाते हैं।    इस वर्ष भी सभी के अपने अलग अलग अनुभव रहे। किसी के लिए यह वर्ष सुखद था तो किसी के लिए यह वर्ष दुखों का सैलाब लेकर आया। सत्य भी है कि इस वर्ष का आरंभ प्रयागराज के महाकुंभ से हुआ जहां की पावन डुबकी से मन तृप्त हो गया था तो वहीं प्राकृतिक आपदाओं और आतंकी घटनाओं से मन विचलित भी था। इस वर्ष की ऐसी हृदय विदारक घटनाओं से मन भय और शंकाओं से घिरकर दुखी होने लगता है लेकिन आने वाले वर्ष की मंगल कामनाओं के लिए मन को मनाना ...

अग्नि टोली और होलिका दहन

Image
अग्नि टोली और होलिका दहन     बच्चे भी न मोबाइल से कहां दूर हो पाते हैं जब बड़े ही बिना मोबाइल के ऐसे तड़पते हैं जैसे बिन पानी के मछली। वैसे भी जब से ऑनलाइन पढ़ाई का चक्कर हुआ है तभी से बच्चों का इंटरनेट की दुनिया में जाना तो स्वाभाविक ही था।    इसीलिए आज का लेख हमारी गली के बच्चों के लिए जिन्होंने विशेषकर कहा कि इस बार का लेख हमारी होलिका दहन पर। शायद वो भी इस वर्चुअल दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।    हमारी गली में छोटे बड़े सब साइज के बच्चे मिलेंगे। कुछ 14 से 16 साल के हट्टे कट्टे तो कुछ 10 से 12 साल के फुर्तीले। कुछ बच्चे 7-8 साल के पिदके हैं तो कुछ 3-4 साल के टिंडे जिसमें जय और उसका दोस्त हैरी भी आता है। पिछले दो साल तो बच्चों ने अपना खेल कोरोना के किश्तों में खेला लेकिन अब तो बिंदास खेल कूद कर रहे हैं। लड़के कहीं क्रिकेट में तो लड़कियां कभी बैडमिंटन या स्टापू खेलती नजर आती हैं।      बच्चे तो बच्चे होते हैं इनमें क्या फर्क कि कौन लड़का और कौन लड़की लेकिन फिर भी बहुत समय से लड़कियों को अलग ही खेलते हुए देखा था। इ...

आशाएं: नई सरकार... नई महिला नीति

Image
आशाएं....नई सरकार...नई महिला नीति   वोट चाहे जिसको भी दिया हो, चुनाव चाहे अब जिस भी पार्टी ने जीता हो, सरकार चाहे अब किसी की पसंद की बनी हो या न हो लेकिन अब जनता के लिए बिना भेदभाव, निष्ठा और ईमानदारी से काम करे बस यही तो एक आम आदमी नई सरकार से चाहता है।     एक आम महिला तो अपने परिवार के लिए महंगाई और रोजगार तक ही सीमित हो जाती है और अपने लिए यहां भी भूल जाती है। ऐसे में सरकार और बुद्धिजीवी लोगों से ही उम्मीद की जा सकती है कि वो महिलाओं के विषय में भी सोचे।   8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया और 10 मार्च को चुनावी परिणाम भी आ गए और इसी के साथ सरकार के प्रति महिलाओं की अपेक्षाएं भी बढ़ गई। जब एक छोटी से छोटी संस्था से लेकर बड़ी बड़ी मल्टी नेशनल कंपनी भी महिला दिवस को व्यापक रूप से मना रही है तो चुनी हुई सरकार से तो उम्मीद की जा सकती है कि उनके पास भी महिलाओं के लिए कुछ विशेष हो। विशेषकर महिला नीति बनने की उम्मीद की जा सकती है जिसमें कुछ पहलुओं को ध्यान में रखा जाए। महिलाओं को स्वस्थ रखने के लिए...   अगर घर की महिला स्वस्थ है त...

छोटी लेकिन यादगार यात्रा: Short but Memorable Rishikesh Trip

Image
Unplanned Trip is better than planned ones... (अनियोजित यात्रा नियोजित यात्रा की तुलना में बेहतर है।)     देहरादून से ऋषिकेश की दूरी केवल 30- 35 किलोमीटर है और अब तो फ्लाईओवर बनने से इस दूरी का पता भी नहीं चलता। गाड़ी में बैठो और आधे पौने घंटे में ही ऋषिकेश पहुंच जाओ लेकिन फिर भी देहरादून से ऋषिकेश जाने के लिए भी पूरा प्लान करना पड़ता है।    मेरा घर भी तो ऋषिकेश में है लेकिन पता नहीं क्यों भाई की शादी के तीन महीने बाद ही नंबर लग पाया मायके जाने का और सभी से मिलने का भी। पिछले दो एक महीने से सोच रहे थे कि एक रात के लिए तो ऋषिकेश चल ही पड़ते हैं इसलिए हर छुट्टी पर यही सोचते लेकिन प्लान बनाते बनाते कब फेल हो जाता पता ही नहीं चलता और हर बार अगले वीकेंड (सप्ताहंत) पर जाने का फिर से मन ही मन प्लान बन जाता।    लेकिन वो कहते हैं न.... You dont always needs a plan,,just go (आपको हमेशा एक योजना की आवश्यकता नहीं होती है, बस निकल जाएं) और ऐसे ही पिछले शनिवार तो बस बिना किसी प्लान के ही आखिर ऋषिकेश पहुंच ही गए।     हां हां, ये पता है कि किसी ...