संदेश

मार्च, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी…

चित्र
क्योंकि बहु भी तो सास बनेगी... माँ, आज घर लौटते हुए थोड़ी देर हो जायेगी... आईने में लिपस्टिक लगाते हुए रंजना ने अपनी सास लता से कहा। क्यो?? आज कुछ खास है क्या??  माँ, वो आज ऑफिस मे सिन्हा जी की रिटायरमेंट पार्टी है और आपको तो पता ही है कि ऑफिस में इसकी  जिम्मेदारी मेरी रहती है। इसलिए आज जल्दी जा रही हूँ ताकि पार्टी के साथ साथ अपना ऑफिस का काम भी जल्दी निपटा लूं।  गाड़ी की चाबी थामे रंजना तेजी से बाहर निकलती है...   अरे,नाश्ता तो कर ले...  नाश्ता वही कर लूंगी... अच्छा तो कम से कम कुछ फल तो ले जा और सुन, इन्हें याद से खा लेना। काम के चक्कर में भूल मत जाना।(रंजना के बैग में फल का डिब्बा डालते हुए लता बड़बड़ाते हुए कहती है ) हमेशा जल्दी में रहती है ये लड़की.. हाँ हाँ पक्का, चलो बाय मां,  बाय दादी।  बाय मां,  बाय दादी, उन्हु। (आंगन मे बैठी दादी ने नाक सिकोड़कर कहा।) न जाने क्या हो गया है आज कल की बहुओं को। न कोई शर्म न कोई लाज। ये मर्दाना कपड़े पहनो, गाड़ी दौड़ाओ, रात को घर देर से आओ और ऊपर से चूल्हा चौके की तो बात ही न करो इनसे।   आजकल की बहुओं को चा...

अग्नि टोली और होलिका दहन

चित्र
अग्नि टोली और होलिका दहन     बच्चे भी न मोबाइल से कहां दूर हो पाते हैं जब बड़े ही बिना मोबाइल के ऐसे तड़पते हैं जैसे बिन पानी के मछली। वैसे भी जब से ऑनलाइन पढ़ाई का चक्कर हुआ है तभी से बच्चों का इंटरनेट की दुनिया में जाना तो स्वाभाविक ही था।    इसीलिए आज का लेख हमारी गली के बच्चों के लिए जिन्होंने विशेषकर कहा कि इस बार का लेख हमारी होलिका दहन पर। शायद वो भी इस वर्चुअल दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।    हमारी गली में छोटे बड़े सब साइज के बच्चे मिलेंगे। कुछ 14 से 16 साल के हट्टे कट्टे तो कुछ 10 से 12 साल के फुर्तीले। कुछ बच्चे 7-8 साल के पिदके हैं तो कुछ 3-4 साल के टिंडे जिसमें जय और उसका दोस्त हैरी भी आता है। पिछले दो साल तो बच्चों ने अपना खेल कोरोना के किश्तों में खेला लेकिन अब तो बिंदास खेल कूद कर रहे हैं। लड़के कहीं क्रिकेट में तो लड़कियां कभी बैडमिंटन या स्टापू खेलती नजर आती हैं।      बच्चे तो बच्चे होते हैं इनमें क्या फर्क कि कौन लड़का और कौन लड़की लेकिन फिर भी बहुत समय से लड़कियों को अलग ही खेलते हुए देखा था। इ...

आशाएं: नई सरकार... नई महिला नीति

चित्र
आशाएं....नई सरकार...नई महिला नीति   वोट चाहे जिसको भी दिया हो, चुनाव चाहे अब जिस भी पार्टी ने जीता हो, सरकार चाहे अब किसी की पसंद की बनी हो या न हो लेकिन अब जनता के लिए बिना भेदभाव, निष्ठा और ईमानदारी से काम करे बस यही तो एक आम आदमी नई सरकार से चाहता है।     एक आम महिला तो अपने परिवार के लिए महंगाई और रोजगार तक ही सीमित हो जाती है और अपने लिए यहां भी भूल जाती है। ऐसे में सरकार और बुद्धिजीवी लोगों से ही उम्मीद की जा सकती है कि वो महिलाओं के विषय में भी सोचे।   8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया और 10 मार्च को चुनावी परिणाम भी आ गए और इसी के साथ सरकार के प्रति महिलाओं की अपेक्षाएं भी बढ़ गई। जब एक छोटी से छोटी संस्था से लेकर बड़ी बड़ी मल्टी नेशनल कंपनी भी महिला दिवस को व्यापक रूप से मना रही है तो चुनी हुई सरकार से तो उम्मीद की जा सकती है कि उनके पास भी महिलाओं के लिए कुछ विशेष हो। विशेषकर महिला नीति बनने की उम्मीद की जा सकती है जिसमें कुछ पहलुओं को ध्यान में रखा जाए। महिलाओं को स्वस्थ रखने के लिए...   अगर घर की महिला स्वस्थ है त...

छोटी लेकिन यादगार यात्रा: Short but Memorable Rishikesh Trip

चित्र
Unplanned Trip is better than planned ones... (अनियोजित यात्रा नियोजित यात्रा की तुलना में बेहतर है।)     देहरादून से ऋषिकेश की दूरी केवल 30- 35 किलोमीटर है और अब तो फ्लाईओवर बनने से इस दूरी का पता भी नहीं चलता। गाड़ी में बैठो और आधे पौने घंटे में ही ऋषिकेश पहुंच जाओ लेकिन फिर भी देहरादून से ऋषिकेश जाने के लिए भी पूरा प्लान करना पड़ता है।    मेरा घर भी तो ऋषिकेश में है लेकिन पता नहीं क्यों भाई की शादी के तीन महीने बाद ही नंबर लग पाया मायके जाने का और सभी से मिलने का भी। पिछले दो एक महीने से सोच रहे थे कि एक रात के लिए तो ऋषिकेश चल ही पड़ते हैं इसलिए हर छुट्टी पर यही सोचते लेकिन प्लान बनाते बनाते कब फेल हो जाता पता ही नहीं चलता और हर बार अगले वीकेंड (सप्ताहंत) पर जाने का फिर से मन ही मन प्लान बन जाता।    लेकिन वो कहते हैं न.... You dont always needs a plan,,just go (आपको हमेशा एक योजना की आवश्यकता नहीं होती है, बस निकल जाएं) और ऐसे ही पिछले शनिवार तो बस बिना किसी प्लान के ही आखिर ऋषिकेश पहुंच ही गए।     हां हां, ये पता है कि किसी ...